जिसे खाने को नहीं था-आज वही बॉलीवुड की चमकती स्टार है!

  • 8 रुपये, एक सपना और मजबूत इरादा: नुसरत भरूचा की प्रेरणादायक कहानी
  • पैसे नहीं थे, फिर भी हौसला नहीं टूटा: कॉलेज से लेकर बॉलीवुड तक का सफर
  • न खाने को था, न खर्च करने को पैसे, फिर भी मुस्कुराती रहीं नुसरत

नई दिल्ली।  बॉलीवुड की चकाचौंध दुनिया में अपनी खास पहचान बना चुकीं एक्ट्रेस नुसरत भरूचा ने हाल ही में अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए चौंकाने वाले खुलासे किए। ‘प्यार का पंचनामा’, ‘सोनू के टीटू की स्वीटी’ और ‘ड्रीम गर्ल’ जैसी हिट फिल्मों में नजर आ चुकीं नुसरत ने बताया कि किस तरह उन्होंने कॉलेज के दिनों में सिर्फ 8 रुपये में एक पूरा दिन गुजारा और कई बार तो भूख लगने पर सिर्फ पानी पीकर काम चलाया।

बचपन से सिखा फाइनेंशियल मैनेजमेंट

नुसरत ने बॉलीवुड बबल को दिए एक इंटरव्यू में कहा, “मैं फाइनेंस मैनेजमेंट में बहुत अच्छी नहीं हूं, लेकिन खराब भी नहीं। मैंने कॉलेज के दिनों से ही ये तय कर लिया था कि कितना खर्च करना है और कितना सेव करना है।” उन्होंने आगे बताया कि उन्होंने अपने अकाउंटेंट्स को स्पष्ट निर्देश दे रखे हैं कि उनकी आमदनी का एक हिस्सा सीधे वेल्थ एडवाइजर को भेजा जाए, ताकि भविष्य के लिए सेविंग हो सके।

परिवार की जिम्मेदारी मेरे कंधों पर है

नुसरत ने बताया कि आज भी उन्हें डर लगता है, क्योंकि उनके ऊपर परिवार की जिम्मेदारी है। “पापा अब 70 के करीब हैं, मम्मी 62 की और दादी 92 की। तीनों मेरे साथ रहते हैं। मुझे हमेशा यह लगता है कि अगर कुछ अनहोनी हो जाए, तो मेरे पास बैकअप होना चाहिए।”

8 रुपये में दिन निकालने का दौर

अपने कॉलेज के दिनों को याद करते हुए उन्होंने बताया, “मैं जुहू से जय हिंद कॉलेज जाती थी। पापा की आर्थिक स्थिति खराब थी। 231 नंबर की बस से सांताक्रूज स्टेशन तक जाती, फिर लोकल ट्रेन से चर्चगेट और वहां से कॉलेज तक पैदल जाती थी। आने-जाने का कुल खर्च सिर्फ 8 रुपये था।” कॉलेज में पानी फ्री था और वही उनकी भूख मिटाने का साधन बन गया।

रेस्टोरेंट में बैठी रही, लेकिन ऑर्डर नहीं किया

नुसरत ने एक भावुक किस्सा भी साझा किया। “बांद्रा के एक रेस्टोरेंट में दोस्तों से मिलने गई, लेकिन पैसे बचाने के लिए सिर्फ फ्रेश लाइम सोडा ऑर्डर किया। भूख लगी थी लेकिन चेहरे पर मुस्कान थी, क्योंकि मुझे अच्छा लग रहा था कि किसी को मेरी हालत का पता नहीं था।”

आज भी पैसा सोच-समझ कर खर्च करती हैं

अपने अनुभवों को साझा करते हुए नुसरत ने कहा, “मैंने 8 रुपये से शुरुआत की थी, इसलिए आज भी पैसा उड़ाने की आदत नहीं है। हां, खर्च करती हूं लेकिन सिर्फ तब जब वाकई जरूरी हो।”

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