- बैकुंठ धाम की शवदाह मशीनें खराब, अंतिम संस्कार में बाधा
- नगर निगम की अनदेखी से करोड़ों की मशीनें जर्जर
- भीषण गर्मी में परिजनों को करना पड़ रहा लंबा इंतजार
लखनऊ। बैकुंठ धाम में नगर निगम द्वारा कोविड काल में करोड़ों रुपए खर्च कर स्थापित की गई कम लकड़ी खपत वाली शवदाह मशीनें अब पूरी तरह से बेकार हो चुकी हैं। कर्मचारियों के मुताबिक, इन मशीनों से केवल तीन शवों का अंतिम संस्कार हो सका, चौथे शव का दाह संस्कार अधूरा रह गया। इसके बाद से मशीनें जंग खाकर जर्जर हालत में पड़ी हैं। चैंबर टूट चुके हैं और चबूतरे पर घास उग आई है।
नगर निगम ने इलेक्ट्रिक शवदाह गृह में भी दो मशीनें लगवाई थीं, जिनमें से एक अब खराब है। मशीन की चेन खराब होने के कारण उसे काफी समय से दुरुस्त नहीं कराया गया। नतीजतन, रोज औसतन पांच शवों का इलेक्ट्रिक तरीके से अंतिम संस्कार प्रभावित हो रहा है, जबकि लकड़ी से दाह संस्कार कराने वालों की संख्या 20 से 25 प्रतिदिन तक पहुंच रही है।
नगर निगम द्वारा मुफ्त में उपलब्ध कराई गई इलेक्ट्रिक शवदाह सुविधा भी अब बाधित है। यह पर्यावरण के अनुकूल विकल्प था, जिसे दुर्घटना में मारे गए, लावारिस और जरूरतमंद लोगों के शवों के लिए विशेष रूप से शुरू किया गया था। मशीनों के खराब होने से अब लोग पारंपरिक विधि से अधिक लकड़ी खर्च कर अंतिम संस्कार करने को मजबूर हैं, जिससे पर्यावरण संरक्षण का मकसद भी विफल हो रहा है।
ऊर्जा हरित शवदाह प्रणाली, जिसका उद्घाटन 9 अप्रैल 2021 को तत्कालीन नगर विकास मंत्री और महापौर ने किया था, वह भी बीते छह महीनों से खराब पड़ी है। पहले जहां तीन प्लेटफॉर्म पर शव जलाए जाते थे, अब बचे हुए दो प्लेटफॉर्म भी इस्तेमाल के लायक नहीं हैं।








