क्या NSAB के पुनर्गठन से भारत की सुरक्षा नीति में बड़ा बदलाव आएगा?

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड (NSAB) का नए सिरे से गठन करते हुए रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (R&AW) के पूर्व प्रमुख आलोक जोशी को इसका नया चेयरमैन नियुक्त किया है। यह फैसला हाल ही में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के मद्देनज़र लिया गया है।

NSAB में छह अन्य सदस्यों को भी शामिल किया गया है, जिनमें सेना, नौसेना और वायुसेना के पूर्व अधिकारी, एक पूर्व राजनयिक और एक पूर्व IPS अधिकारी शामिल हैं। बोर्ड अब राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (NSCS) को रणनीतिक मामलों पर सलाह और इनपुट देगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को सुरक्षा पर कैबिनेट कमेटी (CCS) की बैठक में यह निर्णय लिया गया। इससे पहले 23 अप्रैल को भी CCS की आपात बैठक बुलाई गई थी, जो पहलगाम हमले के अगले दिन हुई थी।

क्या है NSAB?

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड (NSAB) की स्थापना पहली बार 1998 में की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य दीर्घकालिक रणनीतिक आकलन (Long-Term Strategic Assessment) करना और महत्वपूर्ण राष्ट्रीय सुरक्षा मुद्दों पर राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (NSC) को सलाह देना है।

2018 में भी इसका पुनर्गठन किया गया था, तब भारत के रूस में पूर्व राजदूत पीएस राघवन को बोर्ड का चेयरमैन बनाया गया था। अब 2025 में एक बार फिर NSAB को नई दिशा देने के उद्देश्य से इसका पुनर्गठन किया गया है।

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