- जाति जनगणना के लिए केंद्रीय कैबिनेट ने दी मंजूरी, जल्द शुरू हो सकती है प्रक्रिया
- राहुल गांधी ने जाति जनगणना को बताया सामाजिक न्याय का अहम कदम
- जाति जनगणना के लिए सरकारी तैयारी: क्या बदलेंगे जनगणना फॉर्म के कॉलम
नई दिल्ली। आजादी के बाद पहली बार देश में जाति आधारित जनगणना कराए जाने का रास्ता साफ हो गया है। बुधवार को केंद्रीय कैबिनेट ने जाति जनगणना को हरी झंडी दे दी। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि यह जनगणना मुख्य जनगणना के साथ ही कराई जाएगी। संभावना है कि इसकी शुरुआत सितंबर से हो सकती है। गौरतलब है कि कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल लंबे समय से जातिगत जनगणना की मांग करते रहे हैं। अब जबकि साल के अंत में बिहार विधानसभा चुनाव भी होने हैं, इस फैसले को राजनीतिक दृष्टिकोण से भी अहम माना जा रहा है।
जनगणना के आंकड़े 2026 के अंत तक आने की संभावना
केंद्रीय मंत्री के मुताबिक, जनगणना प्रक्रिया को पूरा होने में करीब एक साल का समय लगेगा। ऐसे में अंतिम आंकड़े 2026 के अंत या 2027 की शुरुआत में सार्वजनिक किए जा सकते हैं। पिछली जनगणना 2011 में हुई थी, जबकि अगली 2021 में होनी थी, लेकिन कोविड-19 के कारण इसे टाल दिया गया था।
राहुल गांधी बोले – सरकार ने हमारी बात मानी, लेकिन समयसीमा स्पष्ट हो
जातिगत जनगणना की घोषणा के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा, “आखिरकार सरकार ने जाति जनगणना की बात मानी है। हम इसका समर्थन करते हैं, लेकिन सरकार को इसकी स्पष्ट समयसीमा भी बतानी चाहिए।” उन्होंने यह भी कहा कि तेलंगाना में कराई गई जाति जनगणना को मॉडल के रूप में अपनाया जा सकता है।
जनगणना फॉर्म में होंगे अतिरिक्त कॉलम
अब तक जनगणना फॉर्म में 29 कॉलम होते थे, जिनमें केवल SC-ST से जुड़ी जानकारी ली जाती थी। अब जाति जनगणना के लिए अतिरिक्त कॉलम जोड़े जाएंगे। हालांकि ओबीसी की गणना के लिए जनगणना एक्ट 1948 में संशोधन की आवश्यकता होगी।
जातिगत जनगणना को लेकर नेताओं की प्रतिक्रियाएं
- मल्लिकार्जुन खड़गे: “ये सामाजिक न्याय की दिशा में सही कदम है, जिसकी मांग हम वर्षों से करते आ रहे हैं।”
- तेजस्वी यादव: “यह हमारी जीत है, सरकार को हमारी बात माननी पड़ी।”
- चिराग पासवान: “यह फैसला समावेशी विकास के लिए लिया गया है।”
- केशव प्रसाद मौर्य: “कांग्रेस केवल कहती है, मोदी सरकार करके दिखाती है।”
- उदित राज: “आखिरकार मोदी सरकार को झुकना पड़ा, यह कांग्रेस की जीत है।”
क्या आगे होगा?
जातिगत जनगणना को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म है। जहां विपक्ष इसे सामाजिक न्याय की दिशा में बड़ा कदम बता रहा है, वहीं सरकार इसे विकास और समावेशी नीति से जोड़ रही है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि यह जनगणना कब और कैसे पूरी की जाती है और इसके आंकड़े कब तक सामने आते हैं।








