
- प्रधानाध्यापक की निद्रावस्था ने शिक्षा व्यवस्था पर उभारा सवाल
- आनंद दूबे की लापरवाही ने शिक्षा विभाग को किया कटघरे में
- विद्यालय में पढ़ाई के दौरान प्रधानाध्यापक की सोने की घटना पर अभिभावकों का गुस्सा
अम्बेडकरनगर। सहसा गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक आनंद दूबे की लापरवाही ने शिक्षा व्यवस्था को शर्मसार कर दिया है। कक्षा संचालन के दौरान उनके सोते पाए जाने की घटना ने प्राथमिक शिक्षा की बदहाल स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बच्चों की मौजूदगी में प्रधानाध्यापक की नींद
ग्रामीणों के अनुसार, जब कुछ अभिभावक विद्यालय पहुंचे, तो प्रधानाध्यापक अपनी कुर्सी पर गहरी नींद में थे, जबकि छात्र बिना किसी निगरानी के कक्षा में बैठे हुए थे। यह घटना विद्यालय में शैक्षिक अनुशासन की गिरती स्थिति को उजागर करती है।
पहले भी उठ चुके हैं आरोप
यह पहली बार नहीं है जब प्रधानाध्यापक दूबे पर कार्यशैली को लेकर सवाल उठे हैं। सूत्रों के मुताबिक, इससे पहले भी उन पर कक्षा संचालन में लापरवाही, समय पर विद्यालय न पहुंचने और विद्यार्थियों की उपेक्षा करने के आरोप लग चुके हैं। हालांकि, अब तक प्रशासन की ओर से कोई कड़ी कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे उनकी लापरवाही को बढ़ावा मिल रहा है।
अभिभावकों ने मांगी कार्रवाई
इस घटना से अभिभावकों में गुस्सा है। उनका कहना है कि प्रधानाध्यापक का ऐसा व्यवहार बच्चों की पढ़ाई के साथ-साथ उनकी अनुशासन और सीखने की रुचि को भी प्रभावित कर रहा है। कई अभिभावकों ने शिक्षा विभाग से जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
शिक्षा विभाग की निगरानी पर सवाल
इस मामले ने शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था को भी कठघरे में खड़ा कर दिया है। स्थानीय लोगों का सवाल है कि क्षेत्रीय अधिकारी और बीएसए (खंड शिक्षा अधिकारी) की निरीक्षण प्रणाली इतनी कमजोर क्यों है कि ऐसी लापरवाही लंबे समय तक चलती रहती है।
सरकारी योजनाओं पर पानी फिरने का खतरा
राज्य सरकार और शिक्षा विभाग प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए कई योजनाएं चला रहे हैं, लेकिन ऐसी घटनाएं उन प्रयासों को बेअसर करती हैं। शिक्षकों की जवाबदेही और कर्तव्यनिष्ठा के बिना सरकार के मिशन सफल नहीं हो सकते।
स्थानीय स्तर पर बढ़ी चिंता
इस घटना ने पूरे क्षेत्र में शिक्षा की गिरती गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ा दी है। ग्रामीणों और अभिभावकों ने मांग की है कि प्रशासन तुरंत इस मामले में हस्तक्षेप करे और दोषी शिक्षक के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे।
नोट: शिक्षा विभाग के अधिकारियों से इस मामले में टिप्पणी लेने का प्रयास किया गया, लेकिन उनकी ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं मिला।








