
- संगीत कार्यशाला का दूसरा दिन: राग और लोकगीतों से हुआ गहरा परिचय
- बीएनकेबी कॉलेज में शास्त्रीय संगीत के प्रति बढ़ी उत्सुकता
- प्रशिक्षुओं ने सीखा राग दरबारी और बिलावल के सुरों का अभ्यास
अम्बेडकरनगर। बीएनकेबी पीजी कॉलेज में चल रही 15 दिवसीय संगीत कार्यशाला के दूसरे दिन प्रतिभागियों ने राग, स्वर और लोकगीतों की बारीकियों को सीखा। उत्तर प्रदेश संस्कृति विभाग, भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय लखनऊ और संत गोबिंद साहब कल्चरल क्लब के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यशाला में प्रतिभागियों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली।
मुख्य अतिथियों ने किया प्रोत्साहित
कार्यक्रम के दूसरे दिन मुख्य अतिथि के रूप में पंडित राम लखन शुक्ल राजकीय पीजी कॉलेज के प्राचार्य प्रो. जे.बी. सिंह उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि ऐसी कार्यशालाएँ छात्रों को न केवल संगीत की गहराइयों से जोड़ती हैं, बल्कि उनके सर्वांगीण विकास में भी मदद करती हैं। विशिष्ट अतिथि डॉ. गीता श्रीवास्तव (टीएनपीजी कॉलेज) ने भी प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया। कार्यशाला की अध्यक्षता कर रहीं बीएनकेबी पीजी कॉलेज की प्राचार्य प्रो. शुचिता पांडेय ने अनुशासन और नियमित अभ्यास को संगीत सीखने की आधारशिला बताया।
राग बिलावल और दरबारी का हुआ अभ्यास
कार्यशाला के संयोजक वागीश शुक्ल ने बताया कि प्रशिक्षक सचिन गिरी ने प्रतिभागियों को राग बिलावल और राग दरबारी का अलाप तथा उन पर आधारित गीत सिखाए। साथ ही, संगीत के मूलभूत अलंकारों का भी प्रशिक्षण दिया गया। समन्वयक उपमा पांडेय ने लोकगीतों की सांस्कृतिक महत्ता समझाते हुए प्रतिभागियों को विभिन्न लोकधुनों से परिचित कराया।
लोकसंगीत में दिखी प्रतिभागियों की दिलचस्पी
लोकसंगीत प्रशिक्षण सत्र में प्रतिभागियों ने पारंपरिक गीतों की प्रस्तुति देकर स्थानीय संगीत से जुड़ाव महसूस किया। आयोजकों ने बताया कि आगामी सत्रों में ठुमरी, दादरा और अन्य रचनात्मक विधाओं पर भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। दूसरे दिन भी प्रतिभागियों की उपस्थिति और सक्रियता उत्साहवर्धक रही।
इस कार्यशाला का उद्देश्य युवाओं को भारतीय शास्त्रीय एवं लोक संगीत से जोड़कर सांस्कृतिक विरासत को सहेजना है।








