- बैंक ऑफ बड़ौदा के शेयरों में अचानक बड़ी गिरावट क्यों आई?
- तिमाही नतीजों में क्या छिपा है बैंक के प्रदर्शन का सच?
- नेट इंटरेस्ट इनकम घटी, लेकिन मुनाफा कैसे बढ़ा?
मुंबई। वित्त वर्ष 2025 की चौथी तिमाही के नतीजों के बाद बैंक ऑफ बड़ौदा के शेयरों में जोरदार गिरावट दर्ज की गई। सोमवार, 6 मई को बैंक के शेयर 11% टूटकर 222 रुपए पर बंद हुए। यह गिरावट बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम (ब्याज आय) में 7% की गिरावट के कारण आई है।
हालांकि, तिमाही के दौरान बैंक का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट 3.2% बढ़कर 5,047.7 करोड़ रुपए रहा, जो पिछले साल की समान तिमाही में 4,886.5 करोड़ रुपए था। इसके बावजूद निवेशकों ने ब्याज आय में गिरावट को लेकर निराशा दिखाई। यह 4 जून 2024 के बाद बैंक के शेयरों में आई सबसे बड़ी गिरावट है, जब इसके शेयर 16% लुढ़क गए थे।
शेयरधारकों को मिलेगा डिविडेंड
बैंक ने 8.35 रुपए प्रति शेयर डिविडेंड देने की घोषणा की है। इसके लिए रिकॉर्ड डेट 06 जून 2025 तय की गई है। यानी, जो निवेशक 06 जून तक बैंक के शेयर अपने पास रखेंगे, वे लाभांश पाने के पात्र होंगे।
ऑपरेटिंग प्रॉफिट और टैक्स
जनवरी-मार्च तिमाही में प्रोविजन्स से पहले ऑपरेटिंग प्रॉफिट 8,132 करोड़ रुपए रहा, जो पिछले साल की समान तिमाही में 8,106 करोड़ रुपए था। टैक्स खर्च बढ़कर 1,523 करोड़ रुपए हो गया है, जबकि पिछले साल यह 1,303 करोड़ रुपए था।
प्रोविजन्स और कंटीजेंसीज भी बढ़कर 1,551 करोड़ रुपए हो गईं, जो एक साल पहले 1,302 करोड़ रुपए थीं।
पूरे साल का प्रदर्शन
वित्त वर्ष 2025 में बैंक ऑफ बड़ौदा का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट बढ़कर 19,581 करोड़ रुपए पहुंच गया, जबकि पिछले वर्ष यह 17,788 करोड़ रुपए था। हालांकि, पूरे साल की नेट इंटरेस्ट इनकम 44,368 करोड़ रुपए रही, जो वित्त वर्ष 2024 की तुलना में कम है (45,231 करोड़ रुपए)।
स्टैंडअलोन और कंसॉलिडेटेड नतीजों में अंतर क्या है?
स्टैंडअलोन नतीजों में सिर्फ एक यूनिट का प्रदर्शन दिखाया जाता है, जबकि कंसॉलिडेटेड रिपोर्ट में कंपनी की सभी सब्सिडियरी और सहायक इकाइयों का कुल प्रदर्शन शामिल होता है।
NPA का मतलब क्या होता है?
बैंक द्वारा दिए गए लोन या एडवांस जब 90 दिनों तक वापस नहीं आते, तो उन्हें NPA (नॉन-परफॉर्मिंग एसेट) घोषित कर दिया जाता है। इसका मतलब है कि बैंक को इस राशि से कोई लाभ नहीं मिल रहा।








