ममता बनर्जी की बयानबाज़ी से क्या बदल जाएगा सियासी समीकरण?

  • ममता बनर्जी का बीजेपी पर हमला, अमित शाह को बताया ‘मास्टरमाइंड’
  • 2021 चुनाव के बाद TMC नेताओं की गिरफ्तारी पर भड़की मुख्यमंत्री
  • सीबीआई की भूमिका पर उठाए सवाल, जांच को बताया पक्षपातपूर्ण

मुंबई। 2008 के मालेगांव बम धमाकों के मामले में फैसले का इंतजार और लंबा हो गया है। गुरुवार को मुंबई स्थित एनआईए की विशेष अदालत ने हाईकोर्ट से फैसले के लिए और समय मांगा है और अब 31 जुलाई को इस बहुचर्चित केस में निर्णय आने की उम्मीद है।

इससे पहले साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर सहित सभी आरोपी और पीड़ित कोर्ट में हाजिर हुए। भोपाल की पूर्व सांसद प्रज्ञा ठाकुर इस केस की मुख्य आरोपी हैं। उनके अलावा लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित समेत कुल 12 आरोपियों पर आतंकी साजिश, हत्या और साम्प्रदायिक उन्माद फैलाने के आरोप हैं।

क्या है मालेगांव ब्लास्ट केस?

29 सितंबर 2008 को महाराष्ट्र के मालेगांव में एक बाइक में विस्फोट हुआ था, जिसमें 6 लोगों की मौत और 101 घायल हुए थे। जांच में सामने आया कि बाइक साध्वी प्रज्ञा के नाम पर रजिस्टर्ड थी। शुरुआती जांच महाराष्ट्र एटीएस ने की, लेकिन 2011 में केस एनआईए को सौंपा गया।

जांच एजेंसियों का यू-टर्न

एनआईए ने 2016 में प्रज्ञा ठाकुर समेत 6 आरोपियों को क्लीनचिट दी थी, लेकिन अप्रैल 2025 में एजेंसी ने कोर्ट में याचिका देकर कहा कि आरोपियों को सजा मिलनी चाहिए, क्योंकि उन्हें बेकसूर मानना गलत था।

कोर्ट ने क्यों टाला फैसला?

जज ने कहा कि केस में एक लाख से ज़्यादा दस्तावेज हैं, इसलिए फैसला तैयार करने में समय लग रहा है। सभी आरोपियों को 31 जुलाई को उपस्थित रहने को कहा गया है।

साध्वी प्रज्ञा की प्रतिक्रिया

कोर्ट से निकलने के बाद साध्वी प्रज्ञा ने कहा, “मुझे न्यायपालिका पर पूरा विश्वास है। सत्यमेव जयते की भावना में अडिग हूं।” उन्होंने एटीएस पर आरोप लगाया कि, “अगर वे चाहते, तो मुझे उसी वक्त खत्म कर देते। उन्हें मुझसे निजी दुश्मनी क्यों है, ये मुझे नहीं पता।”

वकील का दावा: “पता चल जाएगा कैसे फंसाया गया”

प्रज्ञा ठाकुर के वकील जेपी मिश्रा ने कहा कि 19 अप्रैल को केस की बहस पूरी हो चुकी थी। अब जजमेंट 31 जुलाई को आएगा और तभी सब कुछ स्पष्ट होगा कि आरोपी कैसे फंसाए गए थे।

गवाहों की उलटी गवाही

केस में 323 गवाह पेश हुए थे, लेकिन 34 गवाह अपने बयान से पलट चुके हैं। कुछ ने आरोप लगाया कि एटीएस ने उनसे जबरन बयान लिए थे, बंदूक की नोक पर हस्ताक्षर कराए गए थे।

ब्लास्ट की साजिश और फंडिंग का दावा

एटीएस के अनुसार यह साजिश अभिनव भारत संगठन द्वारा रची गई थी। संगठन से जुड़े लोगों ने फरीदाबाद, भोपाल, इंदौर और उज्जैन में कई मीटिंग्स की थीं।

  • कर्नल पुरोहित पर आरडीएक्स लाने का आरोप है।
  • बम सुधाकर चतुर्वेदी के घर तैयार हुआ।
  • 21 लाख रुपये की फंडिंग की गई, जिसमें हथियार और आरडीएक्स खरीदे गए।

    एनआईए बनाम एटीएस: दो एजेंसियों की दो राय

    एटीएस ने जिन लोगों को मुख्य आरोपी बताया, एनआईए ने उन्हीं में से कुछ को बरी करने की सिफारिश की। कई सबूतों और गिरफ्तारी को लेकर दोनों एजेंसियों की रिपोर्टों में बड़ा अंतर रहा।

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