- लूचिस्तान में खुला विद्रोह, पाक सरकार की पकड़ कमजोर
- क्या बलूचिस्तान बना रहा है पाकिस्तान से अलग होने की नींव?
- कब और कैसे शुरू हुई बलूचों की आज़ादी की लड़ाई?
इस्लामाबाद। पाकिस्तान को भारत के साथ टकराव के बीच एक नई मुसीबत ने घेर लिया है। बलूचिस्तान में विद्रोही गतिविधियां तेज हो गई हैं, जहां बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने पाकिस्तानी सेना पर हमले बढ़ा दिए हैं और कई इलाकों में आजादी के झंडे फहरा दिए हैं।
बलूच विद्रोहियों ने कब्जे का दावा किया
बलूच विद्रोही संगठनों के तीन गुटों ने बलूचिस्तान के अलग-अलग हिस्सों पर कब्जे का ऐलान किया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में देखा जा सकता है कि विद्रोहियों ने पाकिस्तानी झंडे उतारकर बलूचिस्तान के ध्वज लहराए हैं।
पाकिस्तानी सेना पर हमले, 12 जवान मारे गए
गुरुवार को BLA ने पाकिस्तानी सेना पर दो हमले किए, जिनमें एक रिमोट-नियंत्रित बम विस्फोट शामिल था। इस हमले में पाकिस्तानी सेना के 12 जवान मारे गए। BLA ने इसका वीडियो अपने सोशल मीडिया चैनल पर जारी किया है। पिछले एक हफ्ते में BLA ने कम से कम 4 बड़े हमले किए हैं, जबकि क्वेटा, कच्छ, मस्तंग और काची में छोटे-छोटे हमले हुए हैं।
“बलूचिस्तान को मान्यता दें” – बलूच नेताओं की मांग
बलूच लेखक मीर यार बलूच ने एक्स (ट्विटर) पर लिखा, “बलूचों ने अपने झंडे फहराने शुरू कर दिए हैं। पाकिस्तान के झंडे उतारे जा रहे हैं। अब दुनिया को चाहिए कि वह पाकिस्तान से अपने दूतावास बंद करे और नए मुल्क बलूचिस्तान को मान्यता दे।”
पूर्व PM अब्बासी ने सेना की आलोचना की
पूर्व पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शाहिद खाकान अब्बासी ने चेतावनी दी है कि “सरकार और सेना का बलूचिस्तान पर नियंत्रण खत्म हो रहा है। सेना के वरिष्ठ अधिकारी बिना सुरक्षा के वहां नहीं जा सकते।” उन्होंने सेना प्रमुख आसिम मुनीर के इस दावे को भी खारिज किया कि “बलूच विद्रोही केवल 1500 लोग हैं और वे कभी सफल नहीं होंगे।”
भारत के ऑपरेशन सिंदूर का असर?
कुछ विश्लेषकों का मानना है कि भारतीय सेना के ऑपरेशन सिंदूर के बाद बलूच विद्रोहियों को मौका मिला है और वे पाकिस्तान के खिलाफ अपनी कार्रवाई तेज कर रहे हैं।








