- सेना प्रमुख के नेतृत्व में बढ़ती असहमति,क्या है असंतोष का कारण
- क्या हैं जनरल मुनीर पर आरोप? जानिए सेना प्रमुख की भूमिका
- क्या खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान की दूरी देश के संकट को बढ़ाएगी
इस्लामाबाद। पाकिस्तान में भारत के साथ जारी तनाव के बीच, देश अब आंतरिक संकटों से जूझ रहा है। सेना, राजनीतिक नेतृत्व और संसद के भीतर घेराबंदी की स्थिति बन गई है। सबसे बड़ा संकट पाकिस्तान की सेना के भीतर पनप रहा है, जहां सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर के नेतृत्व पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
सेना प्रमुख पर बढ़ती असंतोष की लहर
जनरल मुनीर के नेतृत्व में पाकिस्तानी सेना में असंतोष की भावना गहरी होती जा रही है। कोर कमांडरों का मानना है कि मुनीर की नीतियों ने न केवल सेना की साख को नुकसान पहुँचाया है, बल्कि देश को भी बार-बार संकटों में डाल दिया है। इन कमांडरों ने खुलकर मुनीर के फैसलों पर सवाल उठाए हैं और उन्हें मौजूदा स्थिति का जिम्मेदार ठहराया है।
सेना प्रमुख के समर्थन में पोस्टर अभियान
मुनीर को अपने समर्थन में पोस्टर लगवाने पड़े, जो पाकिस्तान में पहले कभी नहीं देखा गया। सेना प्रमुख पर आरोप हैं कि उन्होंने अपने परिवार को लाभ पहुँचाया है। इसके साथ ही, मुनीर को धार्मिक विचारों पर अडिग और विरोध को न सहने वाला माना जाता है।
राज्यों में विद्रोह: खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान की स्थिति
पाकिस्तान के अंदरूनी इलाकों में भी स्थिति बहुत तनावपूर्ण है। खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान जैसे सीमावर्ती सूबों ने खुद को जंग से अलग कर लिया है। इन क्षेत्रों में यह धारणा बन रही है कि यह पाक की नहीं, बल्कि पंजाबी सेना की लड़ाई है। खैबर पख्तूनख्वा के लोग यह मानते हैं कि पाकिस्तानी सेना ने आतंकवादियों को बढ़ावा दिया और अब उस नीति के परिणाम भुगतने पड़ रहे हैं।








