नई दिल्ली। अरावली पर्वतमाला को लेकर उठे विवाद ने एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट का रुख कर लिया है। विवाद का केंद्र नई परिभाषा है, जिसके तहत केवल जमीन से 100 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई वाली पहाड़ियों को ही अरावली माना जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया
सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे पर स्वतः संज्ञान लिया है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की वैकेशन बेंच सोमवार को सुनवाई करेगी। बेंच में जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह भी शामिल होंगे। मामला वैकेशन कोर्ट में पांचवें नंबर पर लिस्टेड है।
100 मीटर की नई परिभाषा और विरोध
सुप्रीम कोर्ट ने 20 नवंबर 2025 को केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की समिति की सिफारिश को स्वीकार किया था, जिसमें 100 मीटर या उससे ऊंची पहाड़ियों को अरावली के रूप में मान्यता देने की बात कही गई थी। यह नई परिभाषा राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली-एनसीआर में विरोध का कारण बनी है। पर्यावरण कार्यकर्ता इसे इकोलॉजिकल आपदा बता रहे हैं और खनन के खतरे की चेतावनी दे रहे हैं।
केंद्र और राज्य सरकारों को नोटिस
हरियाणा के रिटायर वन अधिकारी आरपी बलवान ने इस सिफारिश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। अदालत ने केंद्र, राजस्थान, हरियाणा सरकार और पर्यावरण मंत्रालय को नोटिस जारी किया है। कोर्ट शीतकालीन अवकाश के बाद इस मामले में सुनवाई करेगी।
केंद्र ने नए खनन पट्टों पर रोक लगाई
विवाद बढ़ने के बाद केंद्र सरकार ने अरावली रेंज में नए खनन पट्टों पर रोक लगा दी। केंद्रीय वन, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 24 दिसंबर को बयान जारी कर कहा कि पूरी अरावली श्रृंखला में कोई नया खनन लीज नहीं दी जाएगी। राज्य सरकारों को भी किसी भी प्रकार के नए खनन पट्टे जारी करने पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं।








