क्या आप सही उर्वरक का इस्तेमाल कर रहे हैं? मृदा जांच बताएगी रास्ता

  • खरीफ और रबी सत्र में चरणबद्ध तरीके से होगा नमूना संग्रह
  • सटीकता सुनिश्चित करने के लिए जीओ टैगिंग युक्त फोटो अनिवार्य
  • मृदा परीक्षण से किसानों को मिलेगा उर्वरक प्रबंधन में लाभ

अम्बेडकरनगर प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (पीएमकेएसवाई) के तहत “नेशनल प्रोजेक्ट ऑन सॉयल हेल्थ एंड फर्टिलिटी” कार्यक्रम के अंतर्गत जनपद में मृदा नमूना संग्रह अभियान सोमवार से पुनः शुरू किया जाएगा। इस वित्तीय वर्ष में 18,000 मृदा नमूने एकत्र करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसमें से खरीफ सत्र 2025 के दौरान 120 ग्राम पंचायतों से 12,000 नमूने लिए जाएंगे। शेष 6,000 नमूने रबी सत्र में 60 ग्राम पंचायतों से संग्रह किए जाएंगे।

अब तक चार चरणों में संग्रह

अभियान की शुरुआत में 21, 25, 29 अप्रैल और 5 मई को चार चरणों में मृदा नमूने एकत्र किए गए, जिनमें सैकड़ों किसानों को शामिल किया गया। इसकी निगरानी उप कृषि निदेशक डॉ. अश्विनी कुमार सिंह कर रहे हैं।

जीओ-टैगिंग और पारदर्शिता

डॉ. सिंह ने बताया कि नमूना संग्रह के दौरान जीओ-टैगिंग युक्त फोटोग्राफ मोबाइल ऐप के माध्यम से अपलोड किए जा रहे हैं, ताकि प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे। साथ ही, किसानों को मृदा परीक्षण के लाभ, नमूना संग्रह विधि और स्वायल हेल्थ कार्ड के अनुसार उर्वरक उपयोग की जानकारी दी जा रही है।

46 कर्मचारी और 11 कृषि सखियों की तैनाती

अभियान की सफलता के लिए 46 कृषि विभाग के कर्मचारी और 11 कृषि सखियों को विभिन्न ग्राम पंचायतों में तैनात किया गया है। ये टीमें न केवल नमूने एकत्र करेंगी, बल्कि किसानों को मिट्टी की गुणवत्ता और उर्वरक प्रबंधन की जानकारी भी देंगी।

संतुलित उर्वरक से लाभ

इस अभियान से किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के माध्यम से उत्पादकता बढ़ाने और लागत कम करने में मदद मिलेगी। कृषि विभाग का उद्देश्य किसानों को मृदा स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनाकर आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर करना है।

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