- रामायण पाठ में छिपी त्रासदी: जब श्रद्धा के बीच घुला हिंसा का ज़हर
- धारदार चाकू से हमला, गाँव में दहशत का माहौल
- सामान्य विरोध बना खूनी संघर्ष: सगे भाइयों पर जानलेवा हमला
अम्बेडकरनगर। अम्बेडकरनगर के जलालपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत अशरफपुर मझगंवा गाँव में उस वक्त दहशत फैल गई जब रामायण पाठ और भंडारे के शांतिपूर्ण माहौल को अचानक हिंसा ने चीर डाला। भक्ति और पुण्य के रंग में डूबी फिज़ा एकाएक खून से लाल हो गई।
सरकारी कर्मचारी विशाल सिंह अपने छोटे भाई हेमन्त सिंह के साथ गाँव के ही महेन्द्र के यहाँ आयोजित रामायण पाठ के भंडारे में भाग लेने पहुँचे थे। वातावरण पूरी तरह धार्मिक और शांतिपूर्ण था — जब तक कि गाँव के ही रमेश तिवारी, दिनकर त्रिपाठी और उनके साथ मौजूद एक अज्ञात युवक ने दोनों भाइयों से अपशब्द कहना शुरू नहीं किया।
हिंसा का तांडव: सिर पर ताबड़तोड़ वार
विवाद बढ़ा तो माहौल बिगड़ गया। बात-बात में सोनू त्रिपाठी ने धारदार चाकू निकालकर विशाल सिंह के सिर पर कई वार कर डाले। वह लहूलुहान होकर ज़मीन पर गिर पड़े। उनके भाई हेमन्त जब बचाव के लिए दौड़े तो उन पर भी चाकू से हमला कर दिया गया। हेमन्त के हाथ में गंभीर चोट आई है।
ग्रामीणों की तत्परता ने बचाई जान, हालत अब भी गंभीर
घटना के बाद मौजूद ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए दोनों घायलों को तुरंत नगपुर सीएचसी जलालपुर पहुँचाया। डॉक्टरों ने विशाल सिंह के सिर पर कई टाँके लगाए। चिकित्सकों के अनुसार, सिर से लगातार हो रहे रक्तस्राव ने स्थिति को चिंताजनक बना दिया है।
हमलावर फरार, तहरीर दर्ज
घटना को अंजाम देने के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए। पीड़ित हेमन्त सिंह ने स्थानीय कोतवाली में इस घटना की तहरीर दी है। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और हमलावरों की तलाश जारी है।
आस्था और अमन पर सवाल
यह घटना न सिर्फ एक व्यक्ति या परिवार पर हमला है, बल्कि उस सामाजिक सौहार्द्र और धार्मिक समरसता पर भी सवाल है, जिस पर गाँवों की आत्मा टिकी होती है। जिस भूमि पर रामायण पाठ का पाठ हो रहा था, वहाँ खून की धार बहना — समाज को सोचने पर मजबूर करता है।








