
लखनऊ। यूपी सरकार की ओर से राजधानी में आयोजित रोजगार महाकुंभ में मंगलवार को भारी अव्यवस्था देखने को मिली। तीन दिन चलने वाले इस मेले के पहले दिन ही इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के बाहर युवाओं का सैलाब उमड़ पड़ा। करीब 1 लाख युवा नौकरी की तलाश में पहुंचे, जिससे दो किलोमीटर तक सिर्फ युवाओं की भीड़ नजर आई।
रात से जुटने लगे युवा, सुबह तक अफरातफरी
सोमवार देर रात से ही युवा आयोजन स्थल पर पहुंचने लगे थे। मंगलवार सुबह तक इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के चारों तरफ बेरोजगारों का जमावड़ा लग गया। कई अभ्यर्थी रातभर लाइन में खड़े रहे।
सीएम योगी ने किया शुभारंभ
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए कहा—
“सरकार युवाओं को बिना ब्याज और बिना गारंटी के ऋण दे रही है। छह महीने में 70 हजार युवाओं को इसका लाभ दिया जा चुका है। कई लोग अपना खुद का रोजगार भी शुरू कर रहे हैं।”
सरकार का दावा है कि मेले में 100 कंपनियां नौकरी देंगी, जिनमें 20 विदेशी कंपनियां भी शामिल हैं। लक्ष्य 50 हजार युवाओं को रोजगार देने का है।
अव्यवस्था पर नाराजगी, बेरोजगारों के नारे
जॉब फेयर में व्यवस्था पूरी तरह बिगड़ गई। युवाओं की भीड़ बार-बार बैरिकेडिंग तोड़ने लगी। हालात संभालने के लिए डीएम विशाखजी और पुलिस कमिश्नर अमरेंद्र सेंगर खुद मौके पर पहुंचे। युवाओं को बैठाने के लिए पुलिसकर्मी मैदान में उतरे।
युवाओं के आरोप:
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“न नौकरी मिल रही है, न पानी और खाने की व्यवस्था है।”
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“रात से लाइन में लगे हैं, कोई सुनवाई नहीं।”
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“सीवी ले ली, लेकिन उसे कूड़े में फेंक दिया।”
कुछ युवाओं ने आरोप लगाया कि उन्हें जर्मनी में नौकरी का झांसा देकर बुलाया गया था, अब कहा जा रहा है कि दुबई में नौकरी मिलेगी।
कंपनियों की प्रतिक्रिया
एक रिक्रूटमेंट ऑफिसर ने बताया—
“हमें 5,000 सीवी मिली हैं। इन्हें शॉर्टलिस्ट करके इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा









