डीएपी की किल्लत में मुनाफाखोरी का खेल उजागर

गेहूं की बोआई के बीच डीएपी खाद की गुणवत्ता संदिग्ध

स्थानीय बाजार में खाद विक्रेता पर मिलावट का गंभीर आरोप

किसानों ने शिकायत की, मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी कार्रवाई नहीं

अंबेडकरनगर। गेहूं की बोआई के चरम समय में डीएपी खाद की कमी का सामना कर रहे किसानों के बीच मिलावटखोरी का मामला सामने आया है। अहलादे गांव के ग्रामीणों ने स्थानीय बाजार में स्थित एक खाद विक्रेता पर डीएपी की बोरियों में मिलावट कर बेचने का गंभीर आरोप लगाया है। किसानों ने गुरुवार को इसकी शिकायत जिला कृषि अधिकारी से की, लेकिन इससे पहले मुख्यमंत्री पोर्टल पर की गई शिकायत पर भी कोई कार्रवाई न होने से ग्रामीणों में रोष व्याप्त है।

खेत में डालते समय सामने आई खाद की खराब गुणवत्ता

किसानों सोमेन्द्र वीर सिंह,अनूप श्रीवास्तव,रमाशंकर तिवारी व संतराम मौर्य के अनुसार उन्होंने स्थानीय दुकान से डीएपी खाद खरीदी थी, लेकिन जब खेत में इसका उपयोग शुरू किया तो खाद की गुणवत्ता संदिग्ध लगी।
किसानों का कहना है कि खाद की बनावट, रंग और असर सामान्य डीएपी जैसा नहीं था। इससे उन्हें मिलावट की आशंका हुई।

ग्रामीणों के मुताबिक दुकानदार द्वारा डीएपी की मूल बोरियों में अन्य पदार्थ मिलाकर ऊंचे दाम पर बेचा जा रहा है, जिससे किसानों की मेहनत और फसल दोनों जोखिम में पड़ रही हैं।

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