- रक्षा मंत्रालय ने 1.05 लाख करोड़ की 10 रक्षा परियोजनाओं को दी मंजूरी
- बख्तरबंद रिकवरी वाहन, मिसाइलें, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम शामिल
- नौसेना के लिए माइंस और ऑटोनॉमस वेसल्स की खरीद भी मंजूर
नई दिल्ली। आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूती देने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने बुधवार को करीब 1.05 लाख करोड़ रुपये की लागत वाले 10 प्रमुख रक्षा खरीद प्रस्तावों को मंजूरी दे दी। ये सभी खरीद ‘खरीद (भारतीय-आईडीडीएम)’ श्रेणी के तहत की जाएंगी, जो कि स्वदेशी डिजाइन, विकास और निर्माण पर आधारित हैं।
कौन-कौन से उपकरण होंगे शामिल?
रक्षा मंत्रालय ने जिन प्रमुख प्रणालियों की खरीद को मंजूरी दी है, उनमें शामिल हैं:
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बख्तरबंद रिकवरी वाहन (ARVs): युद्ध में क्षतिग्रस्त टैंकों और भारी वाहनों को सुरक्षित निकालने के लिए।
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इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम: दुश्मन की संचार और रडार प्रणाली को निष्क्रिय करने की स्वदेशी तकनीक।
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एकीकृत कॉमन इन्वेंट्री मैनेजमेंट सिस्टम: थल, वायु और नौसेना के बीच बेहतर लॉजिस्टिक समन्वय के लिए।
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सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें: वायुसेना और नौसेना की हवाई सुरक्षा को मजबूती देने के लिए।
नौसेना को भी मिलेगी नई ताकत
भारतीय नौसेना की क्षमताओं को सशक्त करने के लिए भी कई प्रस्तावों को हरी झंडी दिखाई गई है:
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मूर्ड माइंस और माइन काउंटर मेजर वेसल्स: समुद्र में दुश्मन के माइंस का पता लगाने और उन्हें निष्क्रिय करने के लिए।
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सुपर रैपिड गन माउंट (SRGM): समुद्री हमलों से रक्षा करने के लिए तेज फायरिंग वाली बंदूकें।
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सबमर्सिबल ऑटोनॉमस वेसल्स (SAVs): चालक रहित उन्नत निगरानी पोत जो पानी के भीतर खुफिया जानकारी जुटाने में सहायक होंगे।
घरेलू उद्योग को मिलेगा बड़ा फायदा
इन सभी परियोजनाओं को भारतीय कंपनियों द्वारा ही डिजाइन और निर्मित किया जाएगा, जिससे रक्षा क्षेत्र में ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा मिलेगा। यह निर्णय विदेशी आयात पर निर्भरता कम करने और स्थानीय तकनीकी क्षमता विकसित करने की दिशा में मील का पत्थर माना जा रहा है।








