नई दिल्ली। भारत में बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर ल्यूक क्रिस्टोफर काउंटिन्हो ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। क्रिस्टोफर पीएम मोदी के फिट इंडिया मूवमेंट के वेलनेस चैंपियन रहे हैं। याचिका में कहा गया है कि देश में वायु प्रदूषण पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी के स्तर पर पहुंच गया है, जिससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लोगों की सेहत पर गंभीर असर पड़ा है।
याचिका में किए गए मुख्य दावे
- दिल्ली में करीब 22 लाख स्कूली बच्चों के फेफड़ों को नुकसान हुआ है, जिसकी रिकवरी मुश्किल है।
- ग्रामीण और शहरी भारत में हवा की गुणवत्ता लगातार खराब बनी हुई है।
- बड़े शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरु में PM2.5 और PM10 प्रदूषकों का स्तर तय सीमा से कहीं अधिक है।
- दिल्ली में PM2.5 का स्तर 105 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर, कोलकाता में 33 और लखनऊ में 90 दर्ज किया गया।
- वायु अधिनियम 1981 और अन्य कानूनों के तहत पर्याप्त कार्यवाही नहीं हुई। 2019 में दिल्ली में एक भी आपराधिक मामला दर्ज नहीं हुआ।
- GRAP (Graded Response Action Plan) को गंभीर स्थिति में तुरंत लागू नहीं किया गया।
- फॉग स्प्रेयर, आर्टिफिशियल रेन जैसी तकनीकें केवल सीमित राहत देती हैं।
दिल्ली में मिस्ट स्प्रेइंग सिस्टम का प्रोजेक्ट
लोक निर्माण विभाग (PWD) ने बताया कि आनंद विहार में वायु प्रदूषण कम करने के लिए मिस्ट स्प्रेइंग सिस्टम लगाए जाएंगे।
- यह दिल्ली का चौथा सबसे प्रदूषित इलाका है।
- पहले नरेला, बवाना और जहांगीरपुरी में प्रोजेक्ट शुरू किया जा चुका है।
- सिस्टम 2000 लीटर प्रति घंटे की क्षमता वाले RO पानी से छिड़काव करेगा, सुबह 6 बजे से दोपहर 2 बजे और दोपहर 2 बजे से रात 10 बजे तक।
- लागत 4 करोड़ रुपए, जिसमें 5 साल का संचालन और रखरखाव शामिल है।
CPCB के वर्गीकरण के अनुसार:
- 0-50: अच्छा
- 51-100: संतोषजनक
- 101-200: मीडियम
- 201-300: खराब
- 301-400: बहुत खराब
- 401-500: गंभीर








