- बुद्ध का जन्म, ज्ञान प्राप्ति और परिनिर्वाण एक ही दिन
- देश-विदेश से हजारों अनुयायी पहुंचे सारनाथ
- सुरक्षा कारणों से दर्शन स्थगित
वाराणसी। वैशाख पूर्णिमा के पावन अवसर पर भगवान बुद्ध के अनुयायियों के लिए आज का दिन अत्यंत विशेष रहा। मान्यता है कि इसी दिन भगवान गौतम बुद्ध का जन्म हुआ था, उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई थी और उन्होंने इसी दिन महापरिनिर्वाण को प्राप्त किया था। इस त्रि-संयोग वाले दिन को श्रद्धा और आस्था से मनाने के लिए देश-दुनिया से लाखों बौद्ध अनुयायी सारनाथ पहुंचे।
इस बार सुरक्षा कारणों से बुद्ध के पवित्र अस्थि कलश के दर्शन श्रद्धालुओं को नहीं हो सके। हालांकि, उत्सव को भव्यता देने के लिए मंदिर परिसर से लेकर सड़क तक रेड कारपेट बिछाई गई और रंग-बिरंगी झालरों से पूरे क्षेत्र को सजाया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के भी सारनाथ पहुंचकर दर्शन करने की संभावना है।
भोजन व्यवस्था और प्रचार-प्रसार का विशेष इंतज़ाम
बौद्ध समिति के वी.एस. गौतम ने बताया कि आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भोजन की पूरी व्यवस्था की गई है। उन्होंने बताया, “हम बुद्ध के उपदेशों के प्रचार-प्रसार के लिए देशभर में कार्य कर रहे हैं। हमारी समिति के सदस्य हर क्षेत्र में सक्रिय हैं और बौद्ध धर्म की शांति व तर्कशील विचारधारा को जन-जन तक पहुंचा रहे हैं।”
धर्मचक्र परिक्रमा और उपदेश स्थलों का भ्रमण
श्रद्धालु सारनाथ स्थित धर्मचक्र की परिक्रमा करते हुए उपदेश स्थलों का दर्शन कर रहे हैं। बरेली से आए राजेश ने कहा, “हम बुद्ध के उपदेशों को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना चाहते हैं। उन्होंने हमें शांति और अहिंसा का मार्ग दिखाया था, हम उसी रास्ते पर चल रहे हैं।”
इतिहास से जुड़ाव: स्तूपों और संग्रहालयों का दर्शन
सारनाथ न केवल धार्मिक बल्कि ऐतिहासिक दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।








