- संगीत की परंपरा से युवाओं का जुड़ाव कैसे बढ़ रहा है
- बीएनकेबी पीजी कॉलेज में क्यों हुई यह विशेष कार्यशाला
- संगीत कार्यशाला में शामिल हुए कौन-कौन से शास्त्रीय संगीतज्ञों के योगदान
अम्बेडकरनगर। अकबरपुर स्थित बीएनकेबी पीजी कॉलेज में 15 दिवसीय सुगम संगीत कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश, भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय, बी.एन.के.बी. पी.जी. कॉलेज और संत गोबिंद साहब कल्चरल क्लब के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ।
युवाओं को संगीत से जोड़ने की सराहना
नेहरू युवा केंद्र की समन्वयक श्रीमती मीनू बोहरा ने मुख्य अतिथि के रूप में युवाओं के संगीत के प्रति रुझान की प्रशंसा की। उन्होंने कहा, “आज के दौर में जहाँ युवा सोशल मीडिया और तनाव भरी जीवनशैली की ओर बढ़ रहे हैं, वहाँ ऐसी कार्यशालाएँ मानसिक शांति और आत्म-अनुशासन देती हैं।” उन्होंने युवाओं को सिविल डिफेंस से जुड़ने के लिए भी प्रेरित किया।
संगीत और मनोविज्ञान का गहरा नाता
मनोविज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ. विनय कुमार ने बताया कि संगीत मन को शांत करने के साथ-साथ अवसाद और चिंता जैसी मानसिक समस्याओं से निपटने में भी सहायक है।
शास्त्रीय संगीत की विरासत से रूबरू
कार्यक्रम संयोजक वागीश शुक्ल ने बताया कि इस कार्यशाला में प्रशिक्षुओं ने कुमार गंधर्व, उस्ताद बड़े गुलाम अली खाँ, पंडित भीमसेन जोशी, पंडित जसराज और पंडित राजन-साजन मिश्रा जैसे महान संगीतज्ञों के योगदान के बारे में जाना। साथ ही, विभिन्न घरानों की शैली और इतिहास पर भी चर्चा हुई।
सक्रिय भागीदारी रही छात्रों की
कार्यशाला में अन्नू गौर, आयुष श्रीवास्तव, श्वेता सिंह, गौरव शुक्ल, शिल्पी मिश्रा, यशोदा श्रीवास्तव, अरिन गुप्ता समेत कई छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया।
इस आयोजन ने साबित किया कि आधुनिक युग में भी युवाओं की रुचि भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा में बनी हुई है। संगीत के माध्यम से नई पीढ़ी न केवल सांस्कृतिक विरासत से जुड़ रही है, बल्कि मानसिक रूप से भी सशक्त हो रही है।








