लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पहली बार आबकारी विभाग की ओर से इन्वेस्टर समिट का आयोजन मंगलवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान, लखनऊ में हुआ। इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में प्रदेश के आबकारी मंत्री नितिन अग्रवाल ने जानकारी दी कि अब तक विभाग ने ₹40,000 करोड़ के निवेश समझौते (MOU) किए हैं, जिनमें से ₹8,000 करोड़ की परियोजनाएं जमीन पर उतर चुकी हैं।
उन्होंने बताया कि शेष एमओयू को तेजी से क्रियान्वयन की दिशा में ले जाने का कार्य किया जा रहा है। सम्मेलन का उद्देश्य प्रदेश में अल्कोहल आधारित उद्योगों को बढ़ावा देना और राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है।
निवेशकों को मिलेगी हरसंभव मदद
मंत्री नितिन अग्रवाल ने कहा, “प्रदेश सरकार उन निवेशकों को हरसंभव मदद देने के लिए तैयार है जो अब तक किसी कारणवश प्रोजेक्ट पर काम शुरू नहीं कर पाए हैं। सरकार उनके सामने आ रही बाधाओं को दूर करेगी और जल्द निवेश को जमीन पर उतारने के प्रयास करेगी।”
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में यूपी में औद्योगिक निवेश का वातावरण तैयार हुआ है। आबकारी विभाग अब प्रदेश की आर्थिक प्रगति में मुख्य भूमिका निभाने को तैयार है।
2,000 करोड़ के नए MOU की उम्मीद
मंत्री ने यह भी कहा कि समिट के अंत तक करीब ₹2,000 करोड़ के नए एमओयू साइन होने की उम्मीद है। साथ ही उन्होंने बताया कि जिन निवेशकों को किसी प्रकार की अड़चनें आ रही हैं, उनके मुद्दों का समाधान इसी सम्मेलन में किया जाएगा, ताकि वे जल्द से जल्द अपना प्रोजेक्ट शुरू कर सकें।
लखनऊ को बनाया जाएगा अल्कोहल इंडस्ट्री का हब
नितिन अग्रवाल ने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि लखनऊ को अल्कोहल आधारित उद्योगों का नया केंद्र बनाया जाए। उन्होंने बताया कि समिट में कई नए निवेशकों को भी आमंत्रित किया गया है, ताकि उन्हें यूपी में मौजूद विकास की संभावनाओं से अवगत कराया जा सके।
उन्होंने कहा कि आबकारी सम्मेलन प्रदेश के औद्योगिक भविष्य का रोडमैप तय करेगा, जिससे राज्य की जीडीपी में इजाफा और रोजगार के अवसरों का सृजन सुनिश्चित होगा।








