KGMU यूरोलॉजी विभाग में महिला मरीज से छेड़छाड़ मामला

  • KGMU में अल्ट्रासाउंड के दौरान छेड़छाड़ का आरोप
  • आयुष डॉक्टर और वार्ड आया की सेवा समाप्त
  • महिला मरीज ने विभागाध्यक्ष से की शिकायत
  • शुरुआत में मामले को दबाने के आरोप
  • 7 सदस्यीय जांच कमेटी गठित

लखनऊ। KGMU के यूरोलॉजी विभाग में अल्ट्रासाउंड जांच के दौरान महिला मरीज से कथित छेड़छाड़ के मामले में बड़ा एक्शन लिया गया है। आरोपी आयुष डॉक्टर को नौकरी से निकाल दिया गया है, जबकि एक आउटसोर्सिंग वार्ड आया की भी सेवा समाप्त कर दी गई है।

क्या है पूरा मामला?

काकोरी निवासी एक महिला मरीज यूरोलॉजी संबंधी समस्या के इलाज के लिए 1 अप्रैल को KGMU पहुंची थी। जांच के बाद डॉक्टर ने उसे अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह दी। इसी दौरान अल्ट्रासाउंड कक्ष में तैनात एजेंसी के जरिए नियुक्त आयुष डॉक्टर डॉ. शोएब पर छेड़छाड़ का आरोप लगाया गया।

पीड़िता ने विभागाध्यक्ष को लिखित शिकायत दी, लेकिन शुरुआत में मामले को दबाने की कोशिश की गई। बाद में मामला मीडिया और प्रशासनिक स्तर पर सामने आने पर जांच समिति गठित की गई।

 जांच में क्या निकला?

KGMU प्रशासन ने 7 सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच कमेटी बनाई, जिसकी अध्यक्षता यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. अपुल गोयल ने की। जांच में पाया गया कि अल्ट्रासाउंड के समय कक्ष में कोई महिला स्टाफ मौजूद नहीं था।

करीब 14 दिनों की जांच के बाद समिति ने अपनी रिपोर्ट कुलपति को सौंप दी, जिसमें आरोपों को सही पाया गया।

 कार्रवाई

जांच रिपोर्ट के आधार पर कुलपति के निर्देश पर आरोपी आयुष डॉक्टर डॉ. शोएब और वार्ड स्टाफ सविता की सेवा समाप्त कर दी गई। यह तैनाती पीपीपी मॉडल के तहत निजी एजेंसी के माध्यम से की गई थी।

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