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आरक्षित व संरक्षित वन घोषित करने की प्रक्रिया पर विस्तृत चर्चा
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सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों और वन संरक्षण अधिनियम पर विशेष फोकस
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व्यवहारिक प्रशिक्षण व प्रश्नोत्तर सत्र से अधिकारियों को मिली जानकारी
अम्बेडकरनगर। कलेक्ट्रेट सभागार में भारतीय वन अधिनियम से जुड़े प्रावधानों और उनके प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिले के वरिष्ठ प्रशासनिक और वन विभाग के अधिकारी इसमें शामिल हुए और वन कानूनों, न्यायालयीन आदेशों तथा सरकारी भूमि के आरक्षित एवं संरक्षित वन घोषित किए जाने की प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की गई।
अधिकारियों की व्यापक भागीदारी
कार्यशाला की अध्यक्षता अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) डॉ. सदानन्द गुप्ता ने की। इस दौरान प्रभागीय वनाधिकारी डॉ. उमेश तिवारी, उप प्रभागीय वनाधिकारी मुदित सिंह, उपजिलाधिकारी भीटी एवं वन बंदोबस्त अधिकारी, उपजिलाधिकारी टांडा, उपजिलाधिकारी अकबरपुर, उपजिलाधिकारी आलापुर और उपजिलाधिकारी न्यायिक की मौजूदगी रही। वहीं, क्षेत्रीय वनाधिकारी बसखारी और जलालपुर ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई। इसके अलावा, उपजिलाधिकारी जलालपुर समेत कई अन्य अधिकारी गूगल मीट के माध्यम से कार्यशाला से जुड़े।
भारतीय वन अधिनियम पर गहन चर्चा
कार्यशाला में विशेषज्ञों ने भारतीय वन अधिनियम 1927 के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। बताया गया कि किस प्रकार किसी सरकारी भूमि को आरक्षित वन या संरक्षित वन के रूप में अधिसूचित किया जा सकता है और इसके लिए किन प्रक्रियाओं का पालन आवश्यक है। अधिकारियों को इस विषय में व्यवहारिक प्रशिक्षण और विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया, ताकि भूमि प्रबंधन और संरक्षण कार्यवाही में पारदर्शिता और स्पष्टता बनी रहे।








