लखनऊ। राजधानी लखनऊ में नौकरी दिलाने के नाम पर बेरोजगारों से लाखों रुपये की ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। इंदिरानगर पुलिस ने इस गिरोह के मास्टरमाइंड रज्जब अली को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी अपने साथी शैलेंद्र त्रिपाठी और पत्नी खुशबू बानो के साथ मिलकर बेरोजगार युवाओं को झांसे में लेकर फर्जी नियुक्ति पत्र देकर ठगी करता था। पुलिस अब उसके अन्य साथियों की तलाश में जुटी है।
एक साल से घुमाया, फिर धमकाने लगा आरोपी
गणेशगंज निवासी आकृति सिंह ने मई 2024 में तीनों आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। उसने शिकायत में बताया कि मई 2023 में आरोपी शैलेंद्र त्रिपाठी ने उसके भाई की संविदा नौकरी लगवाने के नाम पर 1.25 लाख रुपये लिए। एक साल तक नौकरी नहीं दिलाई और जब पैसे वापस मांगे गए तो जान से मारने की धमकी दी गई।
फर्जी कंपनी से चल रही थी ठगी की स्कीम
जांच अधिकारी एसआई आशीष पाण्डेय ने बताया कि गिरोह लंबे समय से ठगी की वारदातों को अंजाम दे रहा था और पुलिस को चकमा दे रहा था। मंगलवार रात करीब 10:30 बजे सूचना मिली कि एक आरोपी मुंशी पुलिया के पास मौजूद है। पुलिस टीम ने मौके पर दबिश देकर उसे हिरासत में ले लिया।
हिया मल्टी सर्विस प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर होता था खेल
पुलिस पूछताछ में आरोपी की पहचान गोंडा के तरबगंज निवासी रज्जब अली के रूप में हुई। उसने बताया कि ‘हिया मल्टी सर्विस प्राइवेट लिमिटेड’ नाम से एक फर्जी कंपनी रजिस्टर कराई गई थी। कंपनी में रज्जब अली और शैलेंद्र त्रिपाठी डायरेक्टर हैं। दोनों बेरोजगारों को नौकरी का झांसा देकर उनसे मोटी रकम वसूलते थे और बदले में फर्जी नियुक्ति पत्र थमा देते थे।
गिरोह में आरोपी की पत्नी भी शामिल
पुलिस के मुताबिक इस ठगी गैंग में रज्जब की पत्नी खुशबू बानो भी सक्रिय भूमिका निभा रही थी। फिलहाल शैलेंद्र त्रिपाठी और खुशबू बानो की तलाश जारी है। पुलिस ने रज्जब अली को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया है।








