
नई दिल्ली। सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और वित्तीय संस्थानों में निदेशकों की नियुक्ति करने वाली संस्था फाइनेंशियल सर्विसेज इंस्टीट्यूशन ब्यूरो (एफएसआईबी) के अध्यक्ष और अंशकालिक सदस्यों का कार्यकाल एक साल के लिए बढ़ा दिया है। अब ये सभी अधिकारी 30 जून 2026 तक अपने पदों पर बने रहेंगे। यह निर्णय कैबिनेट की नियुक्ति समिति (ACC) द्वारा मंजूर किया गया है।
वर्तमान में एफएसआईबी के अध्यक्ष भानु प्रताप शर्मा हैं, जो डीओपीटी (कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग) के पूर्व सचिव रह चुके हैं। उन्हें 2018 में बैंक बोर्ड ब्यूरो (बीबीबी) के चेयरमैन के रूप में नियुक्त किया गया था और बाद में एफएसआईबी में उनका कार्यकाल बढ़ा।
पिछले वर्ष भी हुआ था सेवा विस्तार
यह पहला मौका नहीं है जब एफएसआईबी का कार्यकाल बढ़ाया गया हो। इससे पहले 2024 में भी एक वर्ष के लिए इसका कार्यकाल बढ़ाया गया था। एफएसआईबी में शामिल अन्य प्रमुख अंशकालिक सदस्य हैं:
अनिमेष चौहान – पूर्व चेयरमैन और एमडी, ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स
दीपक सिंघल – आरबीआई के पूर्व कार्यकारी निदेशक
शैलेन्द्र भंडारी – पूर्व एमडी, आईएनजी वैश्य बैंक
बीमा क्षेत्र के विशेषज्ञों को भी मिला विस्तार
बीमा क्षेत्र से जुड़े तीन अंशकालिक सदस्यों को भी इस सेवा विस्तार में शामिल किया गया है:
उषा सांगवान – एलआईसी की पूर्व प्रबंध निदेशक
एवी गिरिजा कुमार – पूर्व चेयरमैन व एमडी, ओरिएंटल इंश्योरेंस
सुजय बनर्जी – इरडा के पूर्व पूर्णकालिक सदस्य (वितरण)
एफएसआईबी का गठन और भूमिका
वर्ष 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और वित्तीय संस्थानों में शीर्ष स्तर की नियुक्तियों के लिए बैंक बोर्ड ब्यूरो (BBB) की स्थापना की गई थी। बाद में 2022 में इसे संशोधित कर ‘एफएसआईबी’ में बदल दिया गया। इसका मुख्य उद्देश्य है:
पीएसयू बैंकों और वित्तीय संस्थानों में निदेशकों और चेयरमैन की नियुक्ति के लिए सिफारिश करना
सार्वजनिक बीमा कंपनियों के महाप्रबंधकों और निदेशकों के चयन में भूमिका निभाना
एकल इकाई के रूप में नियुक्तियों के लिए पारदर्शी प्रक्रिया सुनिश्चित करना
एफएसआईबी की सिफारिशों के आधार पर प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली एसीसी अंतिम निर्णय लेती है।








