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ब्रिटेन में गर्भाशय ट्रांसप्लांट से सफल जन्म, मेडिकल जगत में एक नई शुरुआत
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ग्रेस डेविडसन ने अपनी बहन का गर्भाशय ट्रांसप्लांट कर जन्म दी बेटी
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ट्रांसप्लांट गर्भाशय से बच्ची का जन्म, मेडिकल इतिहास में पहली बार ब्रिटेन में
लंदन। ब्रिटेन में एक ऐतिहासिक घटना घटित हुई है, जब एक महिला ने ट्रांसप्लांट किए गए गर्भाशय से अपनी पहली संतान को जन्म दिया। यह घटना ब्रिटेन में पहली बार हुई है। ग्रेस डेविडसन, जिन्होंने जन्म से ही निष्क्रिय गर्भाशय के साथ जीवन शुरू किया था, ने 2023 में अपनी बहन का गर्भाशय ट्रांसप्लांट करवाया था। इस ट्रांसप्लांट के लगभग दो साल बाद, फरवरी 2025 में 36 वर्षीय ग्रेस ने स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया।
ग्रेस और उनके पति एंगस ने अपनी बेटी का नाम एमी रखा है, जो उनकी बहन का भी नाम है, जिसने गर्भाशय दान किया था। इस प्रक्रिया ने न सिर्फ परिवार को खुशियों से भर दिया, बल्कि मेडिकल जगत में एक नया अध्याय भी जोड़ दिया।
ट्रांसप्लांट के जरिए जीवन में नया मोड़
2014 में स्वीडन में गर्भाशय ट्रांसप्लांट से पहला बच्चा पैदा हुआ था, और तब से अब तक यह प्रक्रिया 12 देशों में सफलतापूर्वक की जा चुकी है। कुल मिलाकर, 135 से अधिक ट्रांसप्लांट किए गए हैं, जिनमें से लगभग 65 बच्चों का जन्म हुआ है।
ग्रेस की मां बनने की इच्छा ने उनकी बहन एमी को गर्भाशय दान करने के लिए प्रेरित किया, जबकि पहले उनके माता-पिता ने भी इस विचार पर विचार किया था, लेकिन मेडिकल जांच में इसे सही नहीं पाया गया था। इसके बाद एमी ने बिना किसी हिचकिचाहट के अपना गर्भाशय देने का प्रस्ताव दिया।
17 घंटे की सर्जरी, 30 डॉक्टरों की टीम की मेहनत
ग्रेस का ट्रांसप्लांट सर्जरी 2019 से COVID महामारी के कारण स्थगित होती रही, लेकिन फरवरी 2023 में इसे ऑक्सफोर्ड के चर्चिल हॉस्पिटल में किया गया। इस ऑपरेशन को 30 से ज्यादा विशेषज्ञों की टीम ने 17 घंटे की कड़ी मेहनत से पूरा किया।
यह ट्रांसप्लांट प्रक्रिया सफल रही, और कुछ हफ्तों बाद ग्रेस को अपनी पहली बार पीरियड आने के बाद गर्भधारण का मौका मिला। IVF उपचार के जरिए वह पहली बार प्रेग्नेंट हुईं और अब उनकी बेटी एमी की दुनिया में कदम रखा।
MRKH सिंड्रोम से जूझती हुई मां
ग्रेस को बचपन से ही MRKH (मेयर-रोकिटांस्की-कुस्टर-हाउसर) सिंड्रोम था, जिसमें जन्म से ही गर्भाशय या तो नहीं होता है या अधूरा विकसित होता है। हालांकि, उनके अंडाशय पूरी तरह से कार्यरत थे और अंडाणु का निर्माण होता था, लेकिन प्राकृतिक तरीके से गर्भधारण करने में असमर्थता थी। वर्षों तक सरोगेसी और गोद लेने के विकल्पों पर विचार करने के बाद, उन्होंने अपने बच्चे को खुद जन्म देने की इच्छा व्यक्त की, जिसे अब ट्रांसप्लांट के जरिए पूरा किया गया।








