वक्फ संशोधन कानून पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी

  • सुप्रीम कोर्ट की मुस्लिम पक्ष को नसीहत: दलीलें मजबूत हों तभी मिलेगी अंतरिम राहत
  • ASI संपत्तियों को वक्फ घोषित करने पर भी उठा सवाल
  • AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी की याचिका भी शामिल

नई दिल्ली। वक्फ संशोधन अधिनियम की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को लगातार दूसरे दिन सुनवाई हुई। केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने न्यायालय के समक्ष दलील दी कि वक्फ अधिनियम कोई धार्मिक कानून नहीं, बल्कि एक प्रशासनिक कानून है, और इससे धार्मिक स्वतंत्रता पर कोई असर नहीं पड़ता।

“सरकारी जमीन पर कोई दावा नहीं कर सकता” – केंद्र

सुनवाई के दौरान तुषार मेहता ने कहा, “अगर कोई जमीन सरकारी है तो चाहे वह ‘वक्फ बाय यूजर’ हो या कुछ और, उस पर किसी का दावा नहीं बनता। सरकार को उसका अधिकार है कि वह जमीन वापस ले सके, भले ही वह वक्फ घोषित की गई हो।”

उन्होंने स्पष्ट किया कि यह अधिनियम एक बहुत पुरानी समस्या को सुलझाने की दिशा में उठाया गया कदम है, जिसकी शुरुआत वर्ष 1923 में हुई थी।

“बिल सोच-समझकर लाया गया, संसद को अधिकार है”

केंद्र ने यह भी कहा कि वक्फ संशोधन अधिनियम बिना सोच-विचार के पारित नहीं हुआ है। सॉलिसिटर जनरल ने बताया, “JPC (संयुक्त संसदीय समिति) की 96 बैठकों के बाद यह कानून अस्तित्व में आया है। हमें 97 लाख से अधिक सुझाव मिले थे। इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि यह कानून जल्दबाज़ी में बनाया गया।”

“हर याचिकाकर्ता पूरे समुदाय का प्रतिनिधि नहीं”

मेहता ने कहा कि याचिकाएं दायर करने वाले सभी लोग इस कानून से सीधे प्रभावित नहीं हैं और वे पूरे मुस्लिम समुदाय की ओर से नहीं बोल सकते।

सुप्रीम कोर्ट का मुस्लिम पक्ष को निर्देश – “मजबूत और स्पष्ट दलीलें दें”

सुनवाई के दौरान पीठ ने याचिकाकर्ताओं से कहा कि अंतरिम राहत पाने के लिए उन्हें अपनी दलीलों को और अधिक मजबूत बनाना होगा। मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा, “हर कानून के पक्ष में संवैधानिकता की धारणा होती है। जब तक दलीलें स्पष्ट और ठोस नहीं होंगी, कोर्ट हस्तक्षेप नहीं करेगा।”

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ASI संरक्षित संपत्तियों पर भी बहस

याचिकाकर्ता के वकील कपिल सिब्बल ने तर्क दिया कि नए वक्फ कानून के अनुसार यदि कोई संपत्ति ASI (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण) के अधीन है, तो वह वक्फ नहीं हो सकती। उन्होंने इसे संविधान के अनुच्छेद 25 (धार्मिक स्वतंत्रता) का उल्लंघन बताया।

इस पर कोर्ट ने पूछा कि क्या ASI की संपत्ति पर प्रार्थना नहीं हो सकती? क्या वक्फ की मान्यता समाप्त होते ही धार्मिक अधिकार खत्म हो जाते हैं? अदालत ने मुस्लिम पक्ष से इन सवालों पर ठोस जवाब मांगा।

AIMIM सांसद ओवैसी भी याचिकाकर्ताओं में शामिल

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट केवल पांच मुख्य याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है, जिनमें एक याचिका AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी द्वारा दायर की गई है। कोर्ट ने दोनों पक्षों को कुल सात घंटे की बहस के लिए समय निर्धारित किया है। मंगलवार को तीन घंटे की बहस के बाद सुनवाई स्थगित कर दी गई थी, जो बुधवार को फिर से शुरू हुई।

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