- बंदी केवल प्रार्थना पत्र देकर मुफ्त अधिवक्ता की सुविधा पा सकते हैं
- जमानत न मिलने, अपील दाखिल करने और स्वास्थ्य समस्याओं पर त्वरित कार्रवाई के निर्देश
- जेल प्रशासन को खान-पान, गर्मी से राहत, पेयजल, और सफाई पर ध्यान देने के निर्देश
अम्बेडकरनगर। जनपद न्यायाधीश एवं अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अम्बेडकरनगर के निर्देश पर गुरुवार को जिला कारागार परिसर में बन्दियों के लिए विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। इस दौरान कारागार में निरुद्ध बंदियों को प्ली बारगेनिंग प्रणाली, निःशुल्क विधिक सहायता तथा उनके विधिक अधिकारों के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई।
शिविर में अपर जिला जज एवं सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण भारतेन्दु प्रकाश गुप्ता, प्रभारी जेलर तेजवीर सिंह, डिप्टी जेलर सूर्यभान सरोज, डिप्टी चीफ लीगल एड डिफेंस काउंसल राजेश कुमार तिवारी, सहायक लीगल एड डिफेंस काउंसल शरद पाण्डेय, पराविधिक स्वयं सेवक, जेल पीएलवी व अन्य कर्मचारियों की मौजूदगी रही।
अपर जिला जज/सचिव ने अपने संबोधन में बताया कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली एवं राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण लखनऊ द्वारा बंदियों के लिए निःशुल्क अधिवक्ता उपलब्ध कराए जाते हैं। बंदी मात्र एक प्रार्थना पत्र देकर निःशुल्क विधिक सेवा प्राप्त कर सकते हैं और अपने वाद की पैरवी करा सकते हैं।
इसके साथ ही कारागार प्रशासन को निर्देश दिए गए कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 479 से संबंधित यदि कोई विचाराधीन बंदी कारागार में निरुद्ध है, या कोई बंदी जमानत स्वीकृत होने के बावजूद जमानतदार के अभाव में रिहा नहीं हो पा रहा है, तो उसकी सूचना नियमित रूप से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को भेजी जाए। जिन बंदियों की अपील उच्च न्यायालय में दाखिल की जानी है, उसे समयबद्ध रूप से दाखिल कराना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।








