अंबेडकरनगर। टांडा कोतवाली पुलिस ने मानव तस्करी और साइबर स्लेवरी से जुड़े एक बड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का खुलासा करते हुए दो तस्करों को गिरफ्तार किया है। आरोपी युवाओं को नौकरी और बेहतर पैकेज का लालच देकर लाओस व थाईलैंड भेजते थे, जहां गोल्डन ट्रायंगल क्षेत्र में कुख्यात साइबर फ्रॉड कंपनियों में उन्हें कैद कर अमानवीय परिस्थितियों में काम कराया जाता था।
फुलवरिया हाईवे से दोनों तस्कर दबोचे गए
कोतवाली प्रभारी के निर्देशन में उप निरीक्षक श्रीचन्द्र यादव, उप निरीक्षक राहुल कुमार पांडेय, कांस्टेबल धर्मेंद्र यादव और कांस्टेबल राजकुमार की टीम ने मुकदमा संख्या 379/25 धारा 143(2)/318(4) बीएनएस के तहत कार्रवाई करते हुए मोहम्मद खलील निवासी रसूलपुर मुबारकपुर (टांडा) और मोहम्मद साद निवासी येदिलपुर (आजमगढ़) को मंगलवार रात लगभग 11:10 बजे फुलवरिया हाईवे से गिरफ्तार किया। दोनों के विरुद्ध ठोस साक्ष्य मिलने पर पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।
पीड़ित ने एसपी जनदर्शन में खोला पूरा मामला
गोसाईगंज, अयोध्या निवासी आफताब आलम ने पुलिस अधीक्षक के जनदर्शन में शिकायत कर बताया था कि खलील और साद ने विदेश में आकर्षक रोजगार का झांसा देकर उसे लाओस भेजा। वहां पहले उसे एक होटल में ठहराया गया और बाद में बॉर्डर पार कर गोल्डन ट्रायंगल ले जाने की तैयारी की गई। आफताब को यहां “कंप्यूटर संबंधी कार्य” के नाम पर साइबर फ्रॉड कराने की योजना बनाई गई थी।
आफताब ने बताया कि बॉर्डर पहुंचने से पहले उसे तीन घायल युवक मिले, जिन्होंने बताया कि उन्हें भी नौकरी का झांसा देकर यहां लाया गया था। गोल्डन ट्रायंगल की बहुमंजिला इमारतों में कैद कर इनसे बड़े पैमाने पर ऑनलाइन ठगी कराई जाती थी और विरोध करने पर बेरहमी से पीटा जाता था। स्थिति की भयावहता समझते ही आफताब तीनों युवकों के साथ भाग निकला और एयरपोर्ट पहुंच गया।








