लखनऊ में जलकल कर्मचारी ने नौकरी से निकाले जाने पर पिया एसिड

  • 7 साल से सुवेज इंडिया कंपनी में कार्यरत थे दिलीप वाल्मीकि
  • 15 दिन पहले बिना कारण नौकरी से निकाला गया
  • नौकरी की गुहार लगाते-लगाते पी लिया एसिड

लखनऊ। लखनऊ जलकल विभाग में आउटसोर्सिंग से तैनात एक कर्मचारी ने नौकरी से निकाले जाने की पीड़ा में मंगलवार दोपहर आत्महत्या की कोशिश की। महानगर पानी टंकी के पास उसने एसिड पी लिया। गंभीर हालत में उसे पहले सिविल अस्पताल फिर ट्रॉमा सेंटर और देर रात एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसकी हालत अभी भी नाजुक बनी हुई है।

पीड़ित कर्मचारी की पहचान दिलीप वाल्मीकि के रूप में हुई है, जो बीते सात वर्षों से सुवेज इंडिया कंपनी के माध्यम से नगर निगम के तहत कार्यरत थे। परिजनों ने आरोप लगाया कि बिना किसी पूर्व सूचना या गलती के कंपनी ने 15 दिन पहले उन्हें हटा दिया। तब से वे बार-बार अधिकारियों से विनती करते रहे, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।

बिना सुनवाई किए हटाया, तनाव में था कर्मचारी

दिलीप की पत्नी रिंकी वाल्मीकि ने बताया कि नौकरी जाने के बाद से परिवार पर आर्थिक संकट गहरा गया था। दिलीप मानसिक तनाव में थे और लगातार कंपनी के अफसरों से मुलाकात कर नौकरी बहाल करने की गुहार लगाते रहे। लेकिन मंगलवार को हार मानकर उन्होंने यह खौफनाक कदम उठा लिया।

कंपनी पर कर्मचारियों को प्रताड़ित करने का आरोप

उत्तर प्रदेश जलकल विभाग समन्वय समिति के उप संयोजक संदीप अवस्थी ने कहा, “सुवेज इंडिया कंपनी ब्रिटिश हुकूमत की तरह काम कर रही है। कर्मचारियों को प्रताड़ित किया जा रहा है। न सिर्फ काम की स्थिति बदतर हुई है, बल्कि अधिकारी मनमाने ढंग से लोगों की नौकरी छीन रहे हैं।”

कंपनी दबा रही है मामले

इम्प्लाई यूनियन के महामंत्री रमेश कुमार गुप्ता ने बताया कि, “यह पहली घटना नहीं है। पहले भी कर्मचारी इसी तरह मानसिक तनाव में आकर आत्मघाती कदम उठा चुके हैं। लेकिन कंपनी एफआईआर तक दर्ज नहीं होने देती। यह कर्मचारी आत्महत्या नहीं, बल्कि कंपनी की प्रताड़ना का शिकार है।”

उन्होंने मांग की कि जब तक दिलीप अस्पताल में भर्ती हैं, उनके परिवार को नियमित वेतन दिया जाए और इलाज का पूरा खर्च कंपनी वहन करे। साथ ही, स्वस्थ होने पर उनकी पुनर्नियुक्ति की जाए।

परिवार का इकलौता कमाने वाला

दिलीप अलीगंज के पुरनिया इलाके में रहते हैं और पूरे परिवार का एकमात्र सहारा हैं। पत्नी, दो छोटे बच्चे और एक बहन उन पर निर्भर हैं। परिजनों ने कंपनी के खिलाफ महानगर थाने में एफआईआर के लिए तहरीर दी है।

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