भाजपा नेताओं की बयानबाजी पर जमीयत उलेमा-ए-हिंद की आलोचना

  • सुप्रीम कोर्ट को ब्लैकमेल करने की कोशिश करार
  • वक्फ कानून पर बहुसंख्यक तुष्टीकरण का आरोप
  • संसद की शक्तियां सीमित, संविधान से ऊपर नहीं – काब रशीदी

मुरादाबाद। जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने भाजपा नेताओं की ओर से न्यायपालिका पर की जा रही टिप्पणियों और बयानबाजी पर कड़ा विरोध जताया है। संगठन के लीगल एडवाइजर मौलाना काब रशीदी ने भाजपा सांसद निशिकांत दुबे द्वारा सुप्रीम कोर्ट पर की गई टिप्पणी को निराधार और अवैध बताया। रशीदी ने इसे न्यायपालिका को ब्लैकमेल करने की कोशिश और संविधान की बुनियादी बातों से छेड़छाड़ के तौर पर पेश किया। उन्होंने कहा कि वक्फ कानून पर संसद को कानून बनाने का अधिकार है, लेकिन वह किसी खास समुदाय को खुश करने के लिए ऐसा नहीं कर सकती।

भाजपा सांसद निशिकांत दुबे द्वारा सुप्रीम कोर्ट पर की गई टिप्पणी ने तूल पकड़ लिया है, और विपक्षी दल भाजपा को घेरे हुए हैं। भाजपा ने इस बयान को निजी राय बताते हुए इसे पार्टी से नहीं जोड़ा, जबकि जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने इसे लोकतांत्रिक संस्थाओं की अवमानना बताया। मौलाना काब रशीदी ने कहा कि धार्मिक उन्माद फैलाने के आरोपों का कोई आधार नहीं है, और यह बयान सुप्रीम कोर्ट की अवहेलना है।

रशीदी ने यह भी कहा कि संविधान की धर्मनिरपेक्षता धारा के खिलाफ कोई भी कानून नहीं बनाया जा सकता, और संसद को यह अधिकार है कि वह कानून बनाए, लेकिन वह इसे संविधान की आत्मा के खिलाफ नहीं कर सकती। उन्होंने उम्मीद जताई कि सुप्रीम कोर्ट इस बयान पर संज्ञान लेगा और उचित कार्रवाई करेगा ताकि भविष्य में इस तरह की बयानबाजी पर रोक लग सके।

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