पांच साल बाद शुरू होगी कैलाश मानसरोवर यात्रा

  • उत्तराखंड और सिक्किम से जाएंगे 15 जत्थे
  • पांच साल बाद फिर शुरू हो रही यात्रा
  • भारत-चीन संबंधों में सुधार का संकेत

नई दिल्ली। भारत और चीन के बीच लंबे समय से चले आ रहे सीमा तनाव और कोविड-19 के प्रभाव के कारण कैलाश मानसरोवर यात्रा पांच साल तक स्थगित रही। अब स्थिति में सुधार के चलते विदेश मंत्रालय ने 30 जून से 25 अगस्त के बीच यात्रा आयोजित करने की घोषणा की है। इच्छुक यात्री http://kmy.gov.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं।

यात्रा के लिए उत्तराखंड और सिक्किम दो मार्ग तय किए गए हैं। लिपुलेख दर्रे के रास्ते 5 जत्थों में 250 श्रद्धालु और नाथूला दर्रे से 10 जत्थों में 500 यात्री दर्शन के लिए जाएंगे। हर जत्थे में 50 यात्री शामिल होंगे।

कैलाश मानसरोवर चीन के तिब्बत क्षेत्र में स्थित है। धार्मिक मान्यता है कि भगवान शिव इस पर्वत पर निवास करते हैं। हिंदू, जैन और बौद्ध धर्मों के लिए यह अत्यंत पवित्र स्थल है।

पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात के बाद सीमा क्षेत्रों से सेनाओं के पीछे हटने और यात्रा पुनः शुरू करने पर सहमति बनी थी। इसके साथ ही भारत-चीन के बीच डायरेक्ट फ्लाइट सेवाएं भी बहाल हो रही हैं, जो 2020 से बंद थीं।

कैलाश पर्वत की ऊंचाई एवरेस्ट से कम है, फिर भी अब तक कोई इसे फतह नहीं कर पाया है। तीखी चढ़ाई और धार्मिक मान्यताओं के चलते यहां चढ़ाई पर प्रतिबंध है। अब श्रद्धालु उत्तराखंड की व्यास घाटी से भी कैलाश पर्वत के दर्शन कर सकते हैं।

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