
भारतीय राजनीति में अपनी मजबूत वैचारिक पकड़ के लिए जाने जाने वाले वामपंथी दल अब अपने सबसे कमजोर दौर में पहुंच गए हैं। ताजा रुझानों के अनुसार 2026 के बाद देश के किसी भी राज्य में वामपंथी सरकार नहीं रह सकती है। Left Democratic Front का आखिरी गढ़ माने जाने वाले केरल में भी सत्ता हाथ से निकलती दिख रही है।
वामपंथ के पतन की कहानी
वामपंथ का इतिहास बेहद मजबूत रहा है। Communist Party of India Marxist के नेता Jyoti Basu के नेतृत्व में पश्चिम बंगाल में 34 साल तक शासन रहा। लेकिन 2011 के बाद बंगाल में हार और फिर त्रिपुरा में सत्ता गंवाने के बाद पार्टी लगातार कमजोर होती गई।
ऐतिहासिक फैसलों का असर
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार 1996 में ज्योति बसु को प्रधानमंत्री न बनाने का फैसला और 2008 में परमाणु समझौते पर Communist Party of India Marxist द्वारा समर्थन वापस लेना वामपंथ के पतन की बड़ी वजह बना।
केरल में बदलती तस्वीर
अब केरल में United Democratic Front की बढ़त ने वामपंथ के आखिरी किले को भी खतरे में डाल दिया है। मुख्यमंत्री Pinarayi Vijayan के नेतृत्व में लगातार दो जीत के बाद भी इस बार सत्ता बचाना मुश्किल नजर आ रहा है।
नए दौर की शुरुआत
अगर ये रुझान नतीजों में बदलते हैं तो 50 साल में पहली बार भारत में किसी भी राज्य में वामपंथी सरकार नहीं होगी। इसे भारतीय राजनीति में एक बड़े बदलाव और नए दौर की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।









