ओमाहा। दुनिया के सबसे बड़े निवेशक और बर्कशायर हैथवे के CEO वॉरेन बफेट आज, 31 दिसंबर को अपने छह दशक लंबे करियर के बाद CEO पद से इस्तीफा दे रहे हैं। 95 वर्षीय बफेट ने कंपनी के साथ जुड़ी अपनी कई यादगार कहानियों को साझा किया।
बफेट ने मानी ‘सबसे बड़ी गलती’
बफेट ने खुलासा किया कि जिस कंपनी के दम पर वे दुनिया के 9वें अमीर इंसानों में शामिल हुए, उसे खरीदना उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी गलती थी। उन्होंने यह डील किसी बिजनेस प्लान के तहत नहीं बल्कि गुस्से में आकर की थी।
1962 में बफेट ने बर्कशायर का स्टॉक खरीदा था, जब कंपनी के मालिक मिस्टर स्टैंटन ने उनके वादे के मुताबिक 11.50 डॉलर पर स्टॉक नहीं खरीदा और केवल 11.375 डॉलर का ऑफर भेजा। बफेट ने गुस्से में न केवल स्टॉक बल्कि पूरी कंपनी खरीद ली।
बफेट का नजरिया और काम की आदतें
- बफेट ने कहा कि वे रिटायरमेंट पर सोप ओपेरा देखने का इरादा नहीं रखते।
- उन्होंने पुष्टि की कि वे चेयरमैन के तौर पर कंपनी के आसपास रहेंगे और नए CEO ग्रेग के लिए मार्गदर्शन करते रहेंगे।
- बर्कशायर हैथवे के हेडक्वार्टर ओमाहा में बफेट हफ्ते में पांच दिन जाते रहे हैं।
डूबती टेक्सटाइल कंपनी से ट्रिलियन डॉलर कंपनी तक
- 1965 में जब बफेट ने बर्कशायर हैथवे का नियंत्रण संभाला, यह एक संघर्ष कर रही टेक्सटाइल कंपनी थी।
- आज बर्कशायर की वैल्यू 1.09 ट्रिलियन डॉलर (करीब 98 लाख करोड़ रुपए) है।
- कंपनी के पोर्टफोलियो में कोका-कोला, क्राफ्ट हेंज, एप्पल, जीको, नेटजेट्स जैसी बड़ी कंपनियां शामिल हैं।
- बफेट ने माना कि यदि उन्होंने शुरुआती निवेश सीधे इंश्योरेंस बिजनेस में किया होता, तो आज कंपनी की वैल्यू दोगुनी होती।








