लखनऊ। लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी सुनील सिंह की अगुवाई में मंगलवार को 8 माल एवेन्यू स्थित कार्यालय में किसान संगठनों के साथ एक आपात बैठक आयोजित की गई। बैठक में अमेरिका के दबाव में किए जा रहे तथाकथित भारत–अमेरिका व्यापार समझौते को किसान विरोधी, संविधान विरोधी और राष्ट्र विरोधी करार दिया गया। किसान नेताओं ने एक स्वर में इस समझौते का विरोध करते हुए सरकार को कड़ी चेतावनी दी।
बैठक में लोकदल के पदाधिकारियों और किसान संगठनों के वक्ताओं ने कहा कि यह समझौता देशहित में नहीं है, बल्कि प्रधानमंत्री की राजनीतिक मजबूरी का परिणाम है, जिसकी भारी कीमत भारतीय किसान चुका रहा है। नेताओं का आरोप है कि यह समझौता भारतीय कृषि को तबाह करने की एक सोची-समझी साजिश है।
किसान नेताओं ने कहा कि अमेरिका में किसानों को हर साल 60 लाख से लेकर 2 करोड़ रुपये तक की सरकारी सब्सिडी, आधुनिक तकनीक, सस्ती बिजली, सस्ता डीज़ल और पूरी सरकारी सुरक्षा मिलती है, जबकि भारत का किसान महंगे बीज, महंगी खाद, महंगे डीज़ल, कर्ज और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी के बिना खेती करने को मजबूर है। ऐसी स्थिति में शून्य आयात शुल्क पर अमेरिकी कृषि उत्पादों को भारत में प्रवेश देना और भारतीय किसानों पर 18 से 28 प्रतिशत तक निर्यात शुल्क थोपना प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि सीधा आत्मसमर्पण बताया गया।
लोकदल किसान संगठन ने साफ शब्दों में कहा कि यह समझौता किसान विरोधी, संविधान विरोधी और राष्ट्र विरोधी है और इसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।








