- प्रसाद में पूड़ी-सब्जी, बूंदी और मीठा जल, शहर में भक्तिभाव का माहौल
- रजिस्ट्रेशन के लिए “लखनऊ वन” ऐप और हेल्पलाइन नंबर जारी
- प्लास्टिक पर रोक, आयोजकों से प्राकृतिक सामग्री के इस्तेमाल की अपील
लखनऊ | ज्येष्ठ महीने के बड़े मंगल पर राजधानी लखनऊ पूरी श्रद्धा और उत्साह में डूबी नजर आ रही है। शहर में 1000 से अधिक स्थानों पर भंडारों का आयोजन किया जा रहा है, जिनमें से 348 आयोजकों ने नगर निगम में पंजीकरण कराया है। प्रशासन की ओर से सफाई और पेयजल जैसी व्यवस्थाएं चाक-चौबंद की गई हैं।
नगर निगम अधिकारियों की टीमों को जोनवार तैनात किया गया है, जो सफाई के साथ-साथ सिंगल यूज प्लास्टिक के प्रयोग पर निगरानी रख रही हैं। आयोजकों से अपील की गई है कि वे पर्यावरण अनुकूल सामग्री का उपयोग करें।
सेना के सम्मान में भी लगे भंडारे
इस बार भंडारों में धार्मिक आस्था के साथ-साथ देशभक्ति की भावना भी दिखाई दे रही है। कई आयोजकों ने “सेना को सलाम, देश के नाम भंडारा” जैसे नारों के साथ भंडारे आयोजित करने की घोषणा की है। भारत-पाक तनाव के बीच ये भंडारे सेना के जवानों को समर्पित किए जा रहे हैं।
आयोजक अनिल अग्रवाल ने कहा, “भक्तिभाव के साथ देशभक्ति भी जरूरी है। भंडारा सिर्फ सेवा नहीं, एक श्रद्धा है हमारी सेना के लिए।”
आम और खास सभी कर रहे हैं भंडारा
शहर के प्रमुख मंदिरों से लेकर कॉलोनियों, सोसाइटियों और संस्थानों तक हर जगह श्रद्धालु भंडारा करवा रहे हैं। इसमें आम नागरिकों के साथ नेता, अधिकारी और व्यवसायी भी भाग ले रहे हैं। भंडारे में पूड़ी, सब्जी, बूंदी और मीठा पानी प्रसाद के रूप में वितरित किया जा रहा है।
पंजीकरण के लिए हेल्पलाइन नंबर
नगर निगम ने रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को सरल बनाते हुए “लखनऊ वन” ऐप और कंट्रोल रूम नंबर 1533 के साथ चार हेल्पलाइन नंबर (9219902911/12/13/14) जारी किए हैं। आयोजक भंडारे से 24 घंटे पहले तक पंजीकरण करा सकते हैं।
स्वच्छता और सुविधा की पूरी व्यवस्था
हर भंडारे वाले स्थल पर पेयजल, कचरा निस्तारण और सफाई के लिए नगर निगम की टीमें सक्रिय हैं। निगम अधिकारियों ने आयोजकों से अपील की है कि वे प्लास्टिक का प्रयोग न करें और प्राकृतिक व पर्यावरण हितैषी सामग्री का उपयोग करें।
लखनऊ में गूंज रही है आस्था और देशभक्ति की गूंज
बड़े मंगल के मौके पर जहां शहर में आस्था और परंपरा की झलक दिख रही है, वहीं इस बार देशभक्ति की भावना भी लोगों के दिलों में साफ तौर पर देखी जा सकती है। लखनऊ की गंगा-जमुनी तहजीब इस पावन पर्व पर फिर से जीवंत हो उठी है।








