- 244 जिलों में 7 मई को मॉक ड्रिल का आयोजन
- युद्ध जैसी स्थिति में नागरिकों की सुरक्षा पर फोकस
- 1971 युद्ध के बाद पहली बार इतनी बड़ी तैयारी
नई दिल्ली। भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने देश के 244 जिलों में 7 मई को मॉक ड्रिल कराने का आदेश दिया है। इस दौरान नागरिकों को युद्ध या आतंकी हमले जैसी इमरजेंसी स्थिति में खुद को सुरक्षित रखने की ट्रेनिंग दी जाएगी।
सरकार का यह कदम हाल ही में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद सामने आया है, जिसमें 26 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद से ही भारत-पाक सीमा पर तनाव का माहौल है और सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं।
1971 के बाद पहली बार इतने बड़े स्तर पर मॉक ड्रिल
यह पहली बार है जब देशभर में इतने बड़े स्तर पर मॉक ड्रिल की जा रही है। इससे पहले 1971 में भारत-पाक युद्ध के दौरान इस तरह की तैयारी की गई थी। उस समय भी नागरिकों को हमलों से बचाव के लिए प्रशिक्षित किया गया था।
फिरोजपुर छावनी में पहले ही हो चुका है ब्लैकआउट
इससे पहले पंजाब के सीमावर्ती जिले फिरोजपुर छावनी में रविवार-सोमवार रात ब्लैकआउट प्रैक्टिस की गई। इस दौरान रात 9 बजे से 9:30 बजे तक पूरे इलाके की बिजली काट दी गई और हूटर बजाए गए। लोगों को पहले से सूचना दी गई थी कि वे इस दौरान घरों से बाहर न निकलें।
क्या होती है मॉक ड्रिल और ब्लैकआउट एक्सरसाइज?
मॉक ड्रिल एक तरह की रिहर्सल होती है, जिसमें प्रशासन और आम नागरिक किसी आपातकालीन स्थिति में कैसे प्रतिक्रिया देंगे, इसका अभ्यास करते हैं। जैसे बम हमला, एयर स्ट्राइक या अन्य आपदा की स्थिति में।
ब्लैकआउट एक्सरसाइज में तय समय के लिए पूरे इलाके की लाइटें बंद कर दी जाती हैं। इसका उद्देश्य दुश्मन के हमले के दौरान क्षेत्र को अंधेरे में रखना होता है, जिससे टारगेटिंग मुश्किल हो जाए।
दूसरे देशों में भी हुई हैं ऐसी ड्रिल
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अमेरिका (1952): ‘डक एंड कवर’ मॉक ड्रिल में बच्चों को सिर को ढकने और मेज के नीचे छुपने की ट्रेनिंग दी गई थी।
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कनाडा (1942): ‘इफ डे’ ड्रिल में नकली नाजी हमला करवा कर नागरिकों को ब्लैकआउट और सुरक्षा अभ्यास कराया गया।
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ब्रिटेन (1980): ‘स्क्वेयर लेग’ ड्रिल में 150 परमाणु बम हमले की कल्पना कर एयर रेड सायरन बजाए गए और अंधेरा फैलाकर ब्लैकआउट किया गया।
सरकार की तैयारी युद्ध जैसे हालात से पहले
सरकार का मकसद किसी भी संभावित खतरे से पहले नागरिकों को तैयार करना है। सीमावर्ती इलाकों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। आने वाले दिनों में और भी जिलों को मॉक ड्रिल के लिए जोड़ा जा सकता है।







