भादो षष्ठी पर जिलेभर में हल छठ का पर्व धूमधाम से सम्पन्न

  • पूजा के बाद महिलाओं ने कथा-श्रवण और पारंपरिक लोकगीतों का आयोजन किया
  • व्रत की मान्यता: विवाहित महिलाओं को संतान सुख और समृद्धि का आशीर्वाद
  • बाजारों में पूजा सामग्री की बढ़ी मांग, ग्रामीण अंचलों में रही चहल-पहल

अंबेडकर नगर। भादो माह की षष्ठी तिथि पर गुरुवार को जिलेभर में पारंपरिक आस्था का पर्व हल छठ पूरे श्रद्धा-उत्साह के साथ मनाया गया। ग्रामीण अंचलों से लेकर नगर क्षेत्र तक महिलाओं ने व्रत रखकर संतान की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना की। इस अवसर पर मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक आयोजन हुए।

ग्रामों में परंपरागत विधि से सम्पन्न हुई पूजा
रामनगर ब्लॉक के मूसेपुर कला, मनेरीपुर और बसकरी ब्लॉक के हंसवर ग्राम सहित कई स्थानों पर सुबह से ही महिलाएं व्रत की तैयारी में जुटीं। निर्धारित पूजा स्थल पर पहुंचकर उन्होंने परंपरागत सामग्री से पूजा की। श्री दुर्गा माता मंदिर और श्री खाकी बाबा राम जानकी मंदिर में महिलाओं ने कतारबद्ध होकर पूजा-अर्चना की।

भगवान बलराम के जन्म से जुड़ा पर्व
हल छठ का पर्व भगवान बलराम के जन्म से जुड़ा माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण के बड़े भाई बलराम का कृषि और हल से विशेष संबंध रहा है, इसी कारण इस पर्व में हल से जोते गए अनाज का उपयोग वर्जित है। महिलाएं पूजा में महुआ का फल, तिल का चावल और दही का प्रसाद अर्पित करती हैं।

वर्जनाओं का पालन और कथा-श्रवण
पूजा के बाद महिलाएं गोल घेरे में बैठकर बच्चों से जुड़ी पारंपरिक कथाएं और लोकगीत सुनाती हैं। ग्रामीण अंचलों में महिलाएं व्रत के नियमों और वर्जनाओं का विशेष ध्यान रखती हैं। इस अवसर पर किसी भी प्रकार के हल से जुड़े अन्न का प्रयोग नहीं किया जाता।

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