शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के संजौली मस्जिद के बाहर शुक्रवार (14 नवंबर) को विवाद की स्थिति बन गई। पुलिस और स्थानीय महिलाओं के हस्तक्षेप से हालात नियंत्रित हुए। बाहर के मुस्लिम लोगों को जुमे की नमाज पढ़ने से रोका गया, जबकि स्थानीय मुसलमानों को मस्जिद में जाने की अनुमति दी गई।
मौके पर तनाव और सुरक्षा
संजौली मस्जिद और आसपास के बाजार में बड़ी संख्या में पुलिस तैनात रही। स्थानीय महिलाओं ने बाहर से नमाज पढ़ने आए लोगों को वापस भेजा, जबकि कुछ लोगों ने अंदर जाने की जिद भी की।
संजौली मस्जिद का विवादित इतिहास
- संजौली मस्जिद को नगर निगम आयुक्त और जिला अदालत पहले ही अवैध घोषित कर चुके हैं।
- यह विवाद करीब 16 साल पुराना है। इस दौरान केस में 50 से अधिक बार सुनवाई हुई।
- 31 अगस्त 2024 को दो समुदायों में हुई मारपीट के बाद मस्जिद के आसपास प्रदर्शन और तनाव बढ़ा था।
- 12 सितंबर 2024 को मस्जिद कमेटी ने नगर निगम कोर्ट में अवैध हिस्सा तोड़ने की पेशकश की, जिससे मामला शांत हुआ।
नगर निगम और अदालत के आदेश
नगर निगम आयुक्त ने संजौली मस्जिद को अवैध बताते हुए पूरी मस्जिद को हटाने के आदेश दिए हैं। उपरी दो मंजिलें पहले ही तोड़ी जा चुकी हैं। वक्फ बोर्ड और मस्जिद कमेटी द्वारा अदालत में चुनौती के बावजूद 30 अक्टूबर को जिला अदालत ने नगर निगम के आदेश को सही ठहराया, जिससे निचली तीन मंजिल को हटाने का काम अब भी रुका हुआ है।
स्थानीय लोगों की चिंता
हिंदू संगठनों और आसपास के स्थानीय लोगों का आरोप है कि मस्जिद का निर्माण बिना परमिशन और गैर वक्फ भूमि पर किया गया था। स्थानीय महिलाओं ने कहा कि पहले भी बाहरी लोग मस्जिद के आसपास आए और कॉलोनी के घरों में ताक-झांक करते रहे, जिससे लोगों को असुरक्षा का एहसास हुआ।







