- वित्त वर्ष 2025 में निजी खपत का GDP में हिस्सा 61.4% हुआ, 20 वर्षों में उच्चतम
- PFCE में 7.2% की वृद्धि, ग्रामीण मांग बनी बड़ी वजह
- GFCF में 7.1% की वृद्धि, निवेश में थोड़ी सुस्ती
नई दिल्ली। भारत की अर्थव्यवस्था में घरेलू उपभोग यानी निजी खपत ने दो दशक का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। वित्त मंत्रालय की ताजा मासिक आर्थिक रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025 में सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में निजी खपत की हिस्सेदारी 61.4% तक पहुंच गई है, जो पिछले वित्त वर्ष 2024 में 60.2% थी। यह संकेत करता है कि उपभोग आधारित मांग में निरंतर मजबूती बनी हुई है।
निजी खपत में तेज़ी से उछाल
वित्त मंत्रालय के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025 में निजी अंतिम उपभोग व्यय (PFCE) में 7.2% की वृद्धि दर्ज की गई है, जो पिछले वित्त वर्ष की 5.6% वृद्धि से अधिक है। यह तेजी खासकर ग्रामीण मांग में सुधार के चलते आई है। PFCE उन खर्चों को दर्शाता है जो घर और गैर-लाभकारी संस्थाएं वस्तुओं व सेवाओं पर करती हैं।
निवेश में भी सुधार, लेकिन गति थोड़ी धीमी
सकल स्थिर पूंजी निर्माण (GFCF) में भी 7.1% की वृद्धि हुई, हालांकि यह पिछले साल के 8.8% से कुछ कम है। GFCF GDP का 29.9% है, जो महामारी-पूर्व औसत 28.6% से अधिक है, लेकिन हाल के वर्षों से थोड़ा कम है। यह आंकड़ा मशीनरी, इन्फ्रास्ट्रक्चर जैसी पूंजीगत वस्तुओं में निवेश को दर्शाता है।
निर्यात में मजबूती, आयात में गिरावट
रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025 में निर्यात 6.3% बढ़ा, जो कि पिछले वर्ष की 2.2% की तुलना में उल्लेखनीय सुधार है। वहीं, आयात में 3.7% की गिरावट आई, जबकि पिछले साल इसमें 13.8% की तेज़ वृद्धि हुई थी। आयात में गिरावट और निर्यात में मजबूती से शुद्ध निर्यात में सुधार हुआ, जिससे GDP में सकारात्मक योगदान मिला।








