पीएचसी सिकंदरपुर खुद हुआ बीमार, अव्यवस्थाओं से मरीज व स्टाफ बेहाल

  • साफ-सफाई और मेंटेनेंस पर खर्च सिर्फ कागजों में
  • रोजाना 150 से ज्यादा मरीज, सुविधाओं का टोटा
  • ग्रामीणों ने सीएमओ से हस्तक्षेप की मांग की

हजपुरा (अंबेडकरनगर)। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सिकंदरपुर में बदहाली इस कदर हावी है कि इलाज कराने आए मरीज खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। स्थिति यह है कि अस्पताल जहां बीमारियों से लड़ने की जगह होनी चाहिए, वहां गंदगी, झाड़ियां और असुविधाएं मरीजों के लिए खतरा बन चुकी हैं।

गंदगी और झाड़ियों का कब्जा, सांप-बिच्छुओं का बसेरा

अस्पताल परिसर के चारों ओर उगी जंगली झाड़ियों में सांप-बिच्छुओं का डेरा है। दिनदहाड़े सांप दिखाई देना अब आम बात हो चुकी है। इससे मरीजों के साथ-साथ अस्पताल कर्मी भी दहशत में रहते हैं। वहीं झाड़ियों में पनपते मच्छर संक्रमण का खतरा बढ़ा रहे हैं।

पानी के लिए जद्दोजहद, पंखे भी सिर्फ नाम के

स्वास्थ्य केंद्र में पेयजल की व्यवस्था नाममात्र की है। मरीजों और तीमारदारों को पानी के लिए इंडिया मार्का हैंडपंप से मशक्कत करनी पड़ती है। हैंडपंप से पानी निकालना बुजुर्गों और महिलाओं के लिए चुनौती बन चुका है। अस्पताल में लगे पंखों की गति इतनी धीमी है कि गर्मी से राहत मिलना तो दूर, हवा का अहसास भी नहीं होता।

बिजली की आंखमिचौली से इलाज प्रभावित

अस्पताल में बिजली की व्यवस्था भी दयनीय है। अक्सर बिजली गुल हो जाती है और बैकअप के नाम पर कोई व्यवस्था नहीं है। इससे डॉक्टरों व स्टाफ को मरीजों का इलाज करने में भी परेशानी होती है।

साफ-सफाई नदारद, रंगाई-पुताई कब हुई किसी को नहीं पता

अस्पताल की साफ-सफाई और रंग-रोगन की स्थिति भी चिंताजनक है। दीवारों पर गंदगी के निशान, फर्श पर जमी धूल और जाले इसकी पुष्टि करते हैं कि वर्षों से यहां पुताई या साफ-सफाई का कोई काम नहीं हुआ है। मरीजों के बैठने की जगह तक गंदगी से अटी पड़ी है।

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