भवन नया, संचालन पुराने जर्जर ढांचे में
पशु सेवा केंद्र का पुराना भवन जर्जर स्थिति में है। इसके ठीक बगल में नया भवन निर्मित हो चुका है, लेकिन वहां हमेशा ताला लटकता रहता है। संचालन अब भी पुराने भवन में किया जा रहा है, जहां न तो पर्याप्त सुविधाएं हैं और न ही जरूरी दवाएं उपलब्ध रहती हैं।
चिकित्सक की अनुपस्थिति पर आरोप
पशुपालकों का कहना है कि प्रभारी पशु चिकित्साधिकारी अर्चना सिंह शायद ही कभी केंद्र पर बैठती हैं। आरोप है कि वह हाजिरी लगाने के बाद अक्सर अनुपस्थित रहती हैं। इस वजह से पशुपालकों को निजी या अप्रशिक्षित (झोलाछाप) चिकित्सकों का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे इलाज महंगा होने के साथ-साथ पशुओं के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका बनी रहती है।
पशुपालकों की शिकायतें
क्षेत्र के रमापति यादव, संतोष चौधरी, संग्राम यादव, रामदुलार और सेवाराम यादव सहित कई पशुपालकों ने बताया कि केंद्र पर आने पर चिकित्सक प्रायः नहीं मिलती हैं। अधीनस्थ कर्मचारी पूछने पर बताते हैं कि वह किसी काम से अकबरपुर गई हैं। यह स्थिति एक-दो दिन की नहीं बल्कि लंबे समय से बनी हुई है।
जानकारी का अभाव और संपर्क में कठिनाई
केंद्र पर तैनात पैराविट उदय को चिकित्सक के मोबाइल नंबर तक की जानकारी नहीं है। चिकित्सक के कक्ष के मुख्य गेट पर जो नंबर लिखा है, उसमें भी दो अंक मिटा दिए गए हैं, जिससे सीधा संपर्क करना संभव नहीं है।








