- नई मौद्रिक नीति बैठक से आम आदमी को राहत की उम्मीद
- आरबीआई बैठक में ब्याज दरों में बदलाव की अटकलें तेज़
- लोन हो सकते हैं सस्ते, रेपो रेट में संभावित कटौती पर नजरें
नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की नई मौद्रिक नीति समिति (MPC) की पहली बैठक आज 7 अप्रैल से शुरू हो गई है। कयास लगाए जा रहे हैं कि इस बैठक में रेपो रेट में 0.25% की कटौती की जा सकती है, जिससे होम लोन और अन्य ऋण सस्ते हो सकते हैं।
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा 9 अप्रैल को सुबह 10 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस बैठक में लिए गए फैसलों की जानकारी साझा करेंगे। इस समिति में कुल छह सदस्य शामिल होते हैं—तीन आरबीआई के और तीन केंद्र सरकार द्वारा नामित।
फरवरी में भी हुई थी कटौती
चालू वर्ष की पिछली बैठक में रेपो रेट को 6.5% से घटाकर 6.25% कर दिया गया था। करीब पांच वर्षों में पहली बार रेपो रेट में कटौती की गई थी, जिससे बाजार में सकारात्मक संकेत मिले थे।
रेपो रेट घटने का मतलब
रेपो रेट वह दर है जिस पर बैंक आरबीआई से कर्ज लेते हैं। यदि यह दर कम होती है तो बैंकों को सस्ता फंड मिलता है और वे ग्राहकों को भी सस्ती दर पर लोन दे सकते हैं। इससे आपकी EMI पर असर पड़ सकता है और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों को भी बढ़ावा मिल सकता है।
क्यों करता है RBI रेपो रेट में बदलाव?
रेपो रेट में परिवर्तन का मुख्य उद्देश्य महंगाई को नियंत्रित करना और आर्थिक विकास को संतुलित करना होता है। जब महंगाई बढ़ती है, तब रेपो रेट बढ़ाकर बाजार में पैसा कम करने की कोशिश की जाती है। वहीं, जब अर्थव्यवस्था सुस्त होती है, तब रेपो रेट घटाकर मांग को प्रोत्साहित किया जाता है।








