अम्बेडकरनगर। सीबीएसई बोर्ड से संबद्ध वेस्ट्रिज हिल्टन स्कूल, मकोइया बसखारी में बुधवार को ‘भारतीय संविधान के निर्माण में महिलाओं का योगदान’ विषय पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को संविधान निर्माण की ऐतिहासिक प्रक्रिया और उसमें महिलाओं की भूमिका से अवगत कराना रहा।
संविधान सभा में महिलाओं का योगदान बताया गया अविस्मरणीय
कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय के प्रधानाचार्य मोहम्मद मोहसिन खान ने की, जबकि संचालन अतुल त्रिपाठी ने किया। मुख्य अतिथि के रूप में नेशनल इंटर कॉलेज हंसवर के शिक्षक मोहम्मद असलम खान उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि संविधान निर्माण में महिलाओं का योगदान अविस्मरणीय है। संविधान सभा में शामिल महिला सदस्यों ने नारी सशक्तिकरण, समान अधिकार, शिक्षा और सामाजिक सुधार जैसे विषयों को मजबूती से उठाया, जिससे संविधान को व्यापक और समावेशी स्वरूप मिला।
समावेशी समाज की नींव रखने में महिलाओं की भूमिका
प्रधानाचार्य मोहसिन खान ने कहा कि महिलाओं ने संविधान निर्माण के दौरान केवल महिलाओं के अधिकारों तक ही अपनी बात सीमित नहीं रखी, बल्कि समानता, न्याय और सामाजिक समरसता पर आधारित समाज की नींव रखने में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। अतुल त्रिपाठी ने कहा कि संविधान सभा की बहसों में महिला सदस्यों ने लैंगिक समानता, सामाजिक न्याय और मौलिक अधिकारों पर विशेष जोर दिया।
महिला संविधान निर्माताओं के योगदान पर प्रकाश
कार्यक्रम में नूरजहां खान ने सरोजिनी नायडू, सुचेता कृपलानी, हंसा मेहता, राजकुमारी अमृत कौर, बेगम अजीज रसूल और दक्षायणी वेलायुधन जैसी प्रमुख महिला संविधान निर्माताओं के योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला।
इस अवसर पर मो. अशरफ, अश्वनी विश्वकर्मा, मो. जिलानी, श्वेत दूबे, रघुवंश त्रिपाठी, अमित कनौजिया, पूनम मिश्रा, अन्नू मिश्रा, गरिमा शुक्ला, अरीबा जैनब, मुजलफा खातून, नाजरीन सहित विद्यालय के शिक्षक एवं विद्यार्थी मौजूद रहे।








