लखनऊ में बारिश ने बिगाड़ा सब्जी बाजार का हाल

  • बारिश से सब्जी की फसलें बर्बाद, आवक घटने से दाम बढ़े
  • टमाटर 80 रुपए प्रति किलो, शिमला मिर्च, टिंडा, परवल भी महंगे
  • व्यापार पर असर, बिक्री घटी, ग्राहक सीमित मात्रा में खरीद रहे

लखनऊ। लगातार हो रही बारिश ने जहां खेतों में खड़ी सब्जियों की फसलें बर्बाद कर दी हैं, वहीं लखनऊ मंडी में सब्जियों की आवक पर भी असर पड़ा है। फसल खराब होने और आपूर्ति बाधित होने के चलते टमाटर, शिमला मिर्च, टिंडा, परवल जैसी सब्जियों की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखा जा रहा है। टमाटर 80 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है।

फसलें खराब, ट्रांसपोर्ट महंगा

स्थानीय सब्जी व्यापारी राहुल के अनुसार, भारी बारिश के कारण यूपी में टमाटर की पैदावार घट गई है। इस समय आपूर्ति बेंगलुरु से हो रही है, जिससे ट्रांसपोर्टेशन का खर्च भी बढ़ गया है। राहुल ने बताया, “बारिश के कारण टमाटर के फूल झड़ जाते हैं, जिससे फसल नहीं बनती। यही वजह है कि टमाटर की कीमत दो-तीन गुना तक बढ़ चुकी है।”

शिमला मिर्च, टिंडा और परवल भी महंगे

टमाटर के अलावा शिमला मिर्च, टिंडा और परवल जैसी हरी सब्जियों के दाम में भी 10 से 15 रुपये प्रति किलो की वृद्धि हुई है। इन सब्जियों की मांग बनी हुई है, लेकिन आवक कम होने से कीमतों में उछाल आया है।

टमाटर की महंगाई ने बाकी बाजार भी प्रभावित किया

सब्जी विक्रेता उमेश बताते हैं कि पहले रोज तीन-चार बोरे आलू बिक जाते थे, लेकिन अब एक बोरा भी मुश्किल से बिक रहा है। “जब ग्राहक टमाटर नहीं ले पा रहे हैं तो बाकी सब्जियां भी कम खरीदते हैं,” उन्होंने कहा।

स्थिर हैं आलू-प्याज के दाम, फिर भी घटी मांग

हालांकि आलू और प्याज की कीमतें स्थिर हैं, कुछ मामलों में मामूली कमी भी आई है, लेकिन उनकी बिक्री में भी भारी गिरावट दर्ज की गई है। व्यापारी शरीफ अहमद कहते हैं, “बाजार में ग्राहक कम आ रहे हैं, और जो आ रहे हैं, वो भी बहुत सीमित मात्रा में खरीदारी कर रहे हैं।”

रसोई बजट बिगड़ा, उपभोक्ता परेशान

स्थानीय निवासी अरविंद रावत का कहना है कि महंगाई से रसोई का बजट बिगड़ गया है। “पहले रोज टमाटर खरीद लेते थे, अब दो-तीन दिन छोड़कर लेना पड़ता है। दुकानदारों का कहना है कि दाम और बढ़ सकते हैं,” उन्होंने बताया।

व्यापारियों का कहना है कि अगर बारिश कम हुई और आवक सुधरी, तो सब्जियों के दाम में राहत मिल सकती है। तब तक आम जनता को महंगाई की मार झेलनी ही पड़ेगी।

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