मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के एक कार्यसमूह ने आनॅलाइन कर्ज देने वाले डिजिटल/मोबाइल ऐप के सत्यापन के लिए नोडल एजेंसी स्थापित करने और इस काम में लगी इकाइयों का एक स्वनियमन संगठन (एसआरओ) बनवाने की सिफारिश की है।
आईबीआई कार्यसमूह ने डिजिटल ऋण कारोबार में अवैध गतिविधियों की रोकथाम के लिए नया कानून बनाने की सिफारिश भी की है। समूह ने ऐसे मंचों पर ग्राहकों का डाटा जोड़ने के लिए ग्राहकों से पूर्व सहमति लेने और पूरा डाटा भारत में स्थापित सर्ववर पर ही संग्रहित करने की सिफारिश की है।
आरबीआई ने डिजिटल मंचों और मोबाइल ऐप पर कर्ज देने कारोबार में तेजी के बीच ग्राहकों के हित की रक्षा और कारोबार के सुचार परिचालन के संबंध में सुझाव देने के लिए इस कार्य समूह का गठन इस वर्ष 13 जनवरी को किया था। आरबीआई के कार्यकारी निदेशक जयंत कुमार दास की अध्यक्षता में इस समूह ने बारह सूत्री सिफारिशें की हैं। इस रिपोर्ट में डिजिटल कर्ज कारोबार के परिवेश को ग्राहकों के लिए सुरक्षित बनाने के साथ कंपनियों को नवप्रवर्तन के लिए प्रोत्साहन दिए जाने के बारे पर बल दिया गया है।
आरबीआई की गुरुवार को जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार समूह ने ‘आनलाइन ऋण ऐप के सत्यापन के लिए सभी सम्बद्ध पक्षों के साथ परामर्श कर के एक नोडल एजेंसी बनाने की सिफारिश की है। ’समूह ने ऐसे मंचों के लिए स्वनियमन संगठन (एआरओ) की भी सिफारिश की है। कार्यसमूह ने गैरकानूनी डिजिटल ऋण कारोबार की रोकथाम के लिए एक अलग कानून बनाने की भी सिफारिश की है।







