
नई दिल्ली। भारत की अर्थव्यवस्था के लिए चिंता बढ़ाने वाली खबर सामने आई है। सोमवार (30 मार्च) को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले पहली बार 95 के स्तर को पार कर गया।
आज रुपया 88 पैसे कमजोर होकर 95.58 प्रति डॉलर पर पहुंच गया, जो अब तक का सबसे निचला स्तर माना जा रहा है।
वैश्विक तनाव बना बड़ी वजह
विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और युद्ध जैसी स्थिति के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता बढ़ी है। इसका सीधा असर भारतीय मुद्रा पर पड़ा है।
एक महीने में 4% और साल भर में 10% गिरावट
आंकड़ों के अनुसार,
- पिछले एक महीने में रुपया करीब 4% कमजोर हुआ है
- पूरे वित्त वर्ष में 10% से ज्यादा गिरावट दर्ज की गई है
यह गिरावट निवेशकों की चिंता और विदेशी निवेश में कमी का संकेत भी मानी जा रही है।
आम आदमी पर क्या पड़ेगा असर?
रुपए की कमजोरी का असर सीधे आम लोगों की जेब पर पड़ेगा।
- मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक सामान महंगे होंगे (ज्यादातर आयात होते हैं)
- सोना-चांदी की कीमत बढ़ेगी
- कच्चा तेल महंगा होगा, जिससे पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ सकते हैं
- महंगाई (Inflation) में बढ़ोतरी की संभावना
आगे क्या हो सकता है?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय तनाव कम नहीं हुआ, तो रुपए पर दबाव बना रह सकता है। हालांकि, सरकार और रिजर्व बैंक स्थिति को संभालने के लिए जरूरी कदम उठा सकते हैं।







