- बीएनकेबी कॉलेज में अखिल भारतीय साहित्य परिषद का स्थापना दिवस
- “अवध की ज्ञान परंपरा” पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी
- प्राचार्य और प्रमुख विद्वानों ने दीप प्रज्ज्वलन कर उद्घाटन किया
अंबेडकरनगर। बीएनकेबी कॉलेज परिसर शनिवार को साहित्य, संस्कृति और ज्ञान परंपरा के विमर्श का केंद्र बना रहा। अवसर था अखिल भारतीय साहित्य परिषद के स्थापना दिवस का, जो हर वर्ष वाल्मीकि जयंती पर मनाया जाता है। इस मौके पर “अवध की ज्ञान परंपरा” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का उद्घाटन दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ, जिसमें प्राचार्य प्रो. शुचिता पाण्डेय, अखिलेश मिश्र (प्रांत सह-बौद्धिक प्रमुख), शैलेन्द्र (विभाग प्रचारक, अयोध्या), प्रो. सत्यप्रकाश त्रिपाठी (प्रांत मंत्री) और प्रो. सिद्धार्थ पाण्डेय (आईक्यूएसी समन्वयक) ने सहभागिता की।
अवध की सांस्कृतिक विरासत पर हुआ विस्तार से संवाद
संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य अवध की सांस्कृतिक, साहित्यिक और दार्शनिक परंपराओं को समकालीन दृष्टिकोण से समझना और उनकी प्रासंगिकता पर चर्चा करना रहा। परिषद के जिलाध्यक्ष वागीश शुक्ल ने बताया कि इस आयोजन के माध्यम से नई पीढ़ी को अपनी बौद्धिक जड़ों से जोड़ने का प्रयास किया गया।
प्रो. शुचिता पाण्डेय ने कहा— अवध भारतीय आत्मा की ध्वनि है
अपने संबोधन में प्राचार्य प्रो. शुचिता पाण्डेय ने कहा, “अवध की ज्ञान परंपरा भारतीय सभ्यता की आत्मा है। यहाँ का चिंतन, जीवनशैली और लोक व्यवहार आज भी प्रेरणा का स्रोत है।” उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र की सांस्कृतिक गहराई ने सदियों तक भारत को दिशा दी है।
अखिलेश मिश्र का वक्तव्य— अवध केवल भूगोल नहीं, एक चेतना है
विशिष्ट अतिथि अखिलेश मिश्र ने अवध की पहचान को विश्लेषित करते हुए कहा, “अवध केवल एक भौगोलिक क्षेत्र नहीं, बल्कि करुणा, ज्ञान और लोकबुद्धि का प्रतीक है। इस धरती ने तुलसी, कबीर, रहीम और विद्यानिवास मिश्र जैसे विचारकों को जन्म दिया, जिनके विचार आज भी मार्गदर्शक हैं।”








