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- गन्ने की खेती में पिछले दशक की तुलना में भारी गिरावट
- अर्ली वैरायटी में रोग, नई किस्मों से कम उत्पादन
- चीनी मिलों द्वारा भुगतान में देरी से किसानों की परेशानी
अम्बेडकरनगर। जिले में गन्ने की खेती लगातार सिमटती जा रही है। वर्ष 2024-25 में मात्र 40 हजार किसान ही 20 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की खेती कर रहे हैं। यह आंकड़ा पिछले साल की तुलना में लगभग चार प्रतिशत कम है। वहीं, अगर पिछले दशक की बात करें तो यह गिरावट और अधिक चिंताजनक है। वर्ष 2010 से 2020 के बीच जिले में गन्ने की खेती चरम पर थी, जब 47 हजार से अधिक किसान लगभग 26 हजार हेक्टेयर भूमि में गन्ना उगा रहे थे।
अर्ली किस्मों में रोग ने बढ़ाई चिंता
किसानों का कहना है कि पहले जिन किस्मों से बेहतर उत्पादन मिलता था, वे अब बीमारियों की चपेट में हैं। अर्ली वैरायटी जैसे— को-0238 व को-0239— से पहले प्रति हेक्टेयर 800 से 1000 क्विंटल तक उपज मिलती थी। लेकिन अब इन किस्मों में लाल सड़न रोग फैलने से फसल समय से पहले सूख जाती है।
इसके स्थान पर जिन नई किस्मों (0118, 94284, 14201 व 15023) का प्रचार किया जा रहा है, उनसे प्रति हेक्टेयर केवल 500 से 700 क्विंटल उपज ही मिल पा रही है। किसान अजीत, रामकेवल, पवन और इंद्रजीत का कहना है कि फसल की लागत लगातार बढ़ रही है जबकि आमदनी घटती जा रही है। मेहनत और निवेश के बाद भी किसानों के हाथ में कुछ खास नहीं आ रहा।