टीडीटी स्कूल का वार्षिकोत्सव बना भावनाओं और शब्दों का उत्सव

  • सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से सजी रंगारंग शाम
  • मुशायरे की महफिल में डूबी श्रोताओं की रूह
  • ग़ज़लों की मिठास और देशभक्ति की पुकार
अम्बेडकरनगर। टांडा के नैपुरा क्षेत्र स्थित टीडीटी स्कूल का वार्षिकोत्सव इस बार विशेष रूप से यादगार बन गया, जब एक ही शाम में संवेदनाओं, शब्दों और सम्मान का ऐसा संगम देखने को मिला, जिसने श्रोताओं और अभिभावकों के मन को देर रात तक बांधे रखा।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और मुशायरे का संगम
कार्यक्रम की विशेषता यह रही कि जहां एक ओर छात्र-छात्राओं ने अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से मंच को जीवंत किया, वहीं दूसरी ओर मुशायरा और कवि सम्मेलन ने संगीतमय और काव्यात्मक वातावरण रचकर साहित्य और संस्कृति के अद्भुत समागम का साक्षी बना दिया।

चांदनी शबनम का ग़ज़ल और गीतों का जादू
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण प्रसिद्ध शायरा चांदनी शबनम रहीं, जिनकी ग़ज़लों और गीतों ने समां ऐसा बांधा कि श्रोतागण देर रात तक महफिल से उठने को तैयार नहीं हुए। उनकी रचनाओं में प्यार, इंसानियत और सौहार्द्र का संदेश इस तरह घुला मिला था कि तालियों की गूंज रुकने का नाम ही नहीं ले रही थी।

मुशायरे और कवि सम्मेलन का आयोजन
उर्दू सितारे अवार्ड से सम्मानित लेक्चरर असलम खान के संचालन में आयोजित मुशायरा और कवि सम्मेलन की अध्यक्षता वरिष्ठ अधिवक्ता जावेद सिद्दीकी ने की। कार्यक्रम का आगाज़ तालिब रहमानी द्वारा तिलावते कलाम पाक से हुआ।

शायरी की गहराई और देशभक्ति की महक
अनस मसरूर की गंभीर और चिंतनशील शायरी ने जहां विचारों की गहराई में डुबकी लगवाई, वहीं शाह मोहम्मद एडवोकेट की राष्ट्रप्रेम से ओतप्रोत रचनाओं ने उपस्थित जनसमूह के भीतर देशभक्ति की लौ जगा दी। हलचल टांडवी और इंसाफ टांडवी ने हास्य-व्यंग्य की ऐसी फुहारें छोड़ीं कि सभागार देर तक ठहाकों से गूंजता रहा।

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