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जैन तीर्थंकरों की पवित्र शिक्षाएँ: योगी आदित्यनाथ ने समाज को अहिंसा, संयम और परोपकार का संदेश दिया
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वैश्विक मंच पर जैन धर्म का उत्थान: ‘विश्व नमोकार महामंत्र दिवस’ में मिली नई पहचान
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धर्म, संस्कृति और समाज की नई दिशा: जैन धर्म की शिक्षाओं को अपनाने का किया आह्वान
लखनऊ। संगीत नाटक अकादमी, गोमती नगर लखनऊ में आयोजित भव्य ‘विश्व नमोकार महामंत्र दिवस’ कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जैन धर्म की मूल शिक्षाओं और तीर्थंकरों के जीवन को आत्मसात करने की प्रेरणा दी। इस आयोजन में मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश की धरती हमेशा जैन तीर्थंकरों की पवित्र भूमि रही है।
जैन तीर्थंकरों की पवित्र विरासत पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा, “अयोध्या में भगवान ऋषभदेव का जन्म हुआ था, वहीं यहां पांच तीर्थंकरों का जन्म एवं काशी में एक तीर्थंकर का आगमन हुआ।” उन्होंने इस बात पर बल दिया कि जैन धर्म के 24 तीर्थंकरों का जीवन लोक कल्याण को समर्पित रहा है और उनके उपदेश आज भी प्रासंगिक हैं। योगी आदित्यनाथ ने सभी भारतीयों से आग्रह किया कि अपने जीवन में जैन धर्म की अहिंसा, परोपकार और संयम की परंपरा को अपनाएं।
नमोकार महामंत्र का महत्व
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने नमोकार महामंत्र के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि “नमोकार महामंत्र सिर्फ जप का माध्यम नहीं, बल्कि यह भौतिक, दैवीय एवं आध्यात्मिक दुखों से मुक्ति दिलाने का सशक्त उपकरण है।” उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित नौ संकल्पों को जीवन में अपनाने की भी बात की। मुख्यमंत्री ने अतिरिक्त रूप से यह भी कहा कि नमोकार महामंत्र साधना और आत्मशुद्धि की राह खोलता है तथा समाज के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है।
वैश्विक मंच पर जैन धर्म की नई पहचान
इस कार्यक्रम की सबसे खास बात यह रही कि पहली बार ‘विश्व नमोकार महामंत्र दिवस’ को वैश्विक स्तर पर एक साथ मनाया गया। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि इससे जैन धर्म की शिक्षाओं को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान मिली है और यह न केवल समुदाय में बल्कि समाज में नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। भगवान महावीर जयंती की शुभकामनाएं देते हुए मुख्यमंत्री ने उपस्थित लोगों से अपील की कि वे जैन धर्म की मूल शिक्षाओं को अपने जीवन में उतारें







